एंजियोग्राफी एक महत्वपूर्ण जांच है जो यह बताती है कि हमारे शरीर की नसें और धमनियां कितनी साफ हैं और खून सही तरीके से बह रहा है या नहीं। यह टेस्ट विशेष रूप से तब किया जाता है जब किसी मरीज को सीने में दर्दसांस लेने में तकलीफबेचैनी या थकान जैसी समस्याएं महसूस होती हैं। एंजियोग्राफी का उद्देश्य नसों में ब्लॉकेज या रुकावट का पता लगाना है। इसे करने का तरीका सरल हैलेकिन बेहद सावधानी के साथ किया जाता है।अक्सर एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी को एक साथ सुना जाता हैलेकिन दोनों अलग प्रक्रियाएं हैं। एंजियोग्राफी सिर्फ यह दिखाती है कि किसी नस या आर्टरी में रुकावट है या नहीं। वहींएंजियोप्लास्टी उस रुकावट को दूर करने की प्रक्रिया है। यानी पहले एंजियोग्राफी के जरिए समस्या का पता लगाया जाता है और अगर जरूरत पड़े तो एंजियोप्लास्टी या स्टेंटिंग कराई जाती है।
एंजियोग्राफी के दौरान डॉक्टर उस हिस्से की नस में एक पतली ट्यूब यानी कैथेटर डालते हैंजो आमतौर पर हाथ या पैर के माध्यम से किया जाता है। इसके जरिए एक विशेष डाई या रंगीन द्रव्य नसों में भेजा जाता है। जब यह द्रव्य नसों में चलता हैएक्स-रे मशीन उसका मार्ग कैप्चर करती है और डॉक्टर को स्पष्ट रूप से दिखता है कि खून सही तरीके से बह रहा है या किसी हिस्से में ब्लॉकेज है। यह प्रक्रिया आमतौर पर लगभग एक घंटे की होती है। टेस्ट के बाद कैथेटर हटाया जाता है और जिस जगह से डाला गया था उसे बंद कर दिया जाता है। मरीज को आराम करना जरूरी होता है।
अगर जांच में ब्लॉकेज पाए जाने पर डॉक्टर एंजियोप्लास्टी या स्टेंट लगाने की सलाह देते हैं। इसके बाद मरीज को जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी कुछ सावधानियों का पालन करना होता है। इसमें भारी वजन उठाने से बचनाधूम्रपान और शराब से दूर रहनादवाइयों का नियमित सेवन और खान-पान में सुधार शामिल हैं। हल्की एक्सरसाइज करनाफल-सब्जियों का सेवनहेल्दी तेल का इस्तेमालऔर नमक व चीनी कम करना भी महत्वपूर्ण है।दिल की सेहत बनाए रखने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांचसमय पर डॉक्टर से परामर्श और एंजियोग्राफी जैसी आधुनिक जांचों को अपनाना बेहद जरूरी है। इस तरह मरीज न केवल गंभीर स्वास्थ्य जोखिम से बच सकता हैबल्कि बेहतर जीवनशैली अपनाकर दिल की दीर्घायु सुनिश्चित कर सकता है।
