नई दिल्ली । सर्दियों में वातावरण में बदलाव होने पर लोग अक्सर छाती में हल्का दर्दभारीपन या जकड़न की शिकायत करते हैं। यह केवल दिल से जुड़ी बीमारियों का संकेत नहीं होताबल्कि सर्दियों में होने वाली ठंडक और जकड़न का परिणाम है। ठंडी हवाओं से फेफड़ों में संकुचन बढ़ता हैजिससे छाती में कफ की अधिकता हो जाती है और सांस लेने में परेशानी होती है। इस समस्या से निपटने के लिए आयुर्वेद में कुछ प्रभावी उपाय बताए गए हैं।
सीने में जकड़न का कारण
सर्दियों में ठंडी हवा और वातावरण के बदलाव से शरीर की नसों में संकुचन आता है। यही वजह है कि सर्दी में छाती में भारीपन और दर्द की समस्या होती है। जब फेफड़ों में संकुचन बढ़ता हैतो कफ का निर्माण अधिक होने लगता हैजो सांस लेने और बोलने में कठिनाई उत्पन्न करता है। यह समस्या खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा होती है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
आयुर्वेदिक उपाय
आयुर्वेदिक उपाय
आयुर्वेद में इस समस्या से राहत पाने के लिए कई सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं।
गुनगुने पानी में शहद
गुनगुने पानी में शहद मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से कफ ढीला होता है और गला नरम रहता है। यह उपाय छाती में जकड़न को कम करने में सहायक होता है।
छाती की मालिश
सरसों के तेल में लहसुनअजवाइन और लौंग को पका कर इस मिश्रण से छाती और कंधे की हल्की मालिश करें। रात को सोने से पहले यह मालिश करने से शरीर गर्म रहता है और दर्द में आराम मिलता है।
भाप लेना
दिन में दो बार भाप लें। भाप को मुंह से अंदर खींचने से कफ ढीला होता है और फेफड़ों की मांसपेशियों को आराम मिलता है। यह छाती की जकड़न से राहत दिलाने में मदद करता है।
चूर्ण का सेवन
आयुर्वेदिक चूर्ण जैसे सितोपलादि चूर्णतालीसागी चूर्ण या त्रिकुट चूर्ण का सेवन करने से शरीर गर्म रहता है और पाचन शक्ति मजबूत होती है। ये चूर्ण कफ को कम करने में सहायक होते हैं। सर्दी में छाती में जकड़न और दर्द की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिएक्योंकि यह अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। आयुर्वेद के प्राकृतिक उपायों को अपनाकर इस समस्या से राहत पाई जा सकती है। अगर समस्या बढ़ जाए तो डॉक्टर से संपर्क करना भी जरूरी है।
