ट्रायंगल ट्रिक अपनाएं
अगर सीधे आंखों में देखना आपको असहज करता है, तो आप सामने वाले के चेहरे पर एक काल्पनिक त्रिकोण ट्रायंगल बना सकते हैं। इस ट्रिक में आप कभी एक आंख कभी दूसरी आंख और फिर नाक या होंठ के पास नजर डाल सकते हैं। इससे सामने वाले को लगेगा कि आप उनकी बातों को ध्यान से सुन रहे हैं और आपको भी दबाव महसूस नहीं होगा। यह तरीका आपको आई कॉन्टैक्ट बनाए रखने में सहज बनाएगा, खासकर जब आप शुरुआत कर रहे हों।
50/70 का आसान फॉर्मूला
आपको हमेशा आंखों में आंखें डालकर बात करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, आप बातचीत के दौरान लगभग आधे समय आंखों में देखें (जब आप बोल रहे हों) और 70% समय जब सामने वाला बोल रहा हो, तो आंखों में आंखें डालें। यह संतुलन एक स्वाभाविक और आत्मविश्वास से भरी बातचीत को जन्म देता है।
आंखों के रंग पर ध्यान दें
कभी किसी से पहली मुलाकात हो, तो उनके आंखों का रंग पहचानने की कोशिश करें। ऐसा करने से आपको कुछ सेकंड के लिए नजर मिलानी पड़ेगी, जो धीरे-धीरे आई कॉन्टैक्ट बनाने की आदत बना सकती है। यह एक आसान तरीका है, जिससे आप आत्मविश्वास से बात करने की दिशा में एक कदम और बढ़ सकते हैं।
अपनों के साथ अभ्यास करें
सीधे अजनबियों या इंटरव्यू में खुद को परखने से पहले, दोस्तों, परिवार या करीबी लोगों के साथ प्रैक्टिस करें। जब आप अपने परिचितों के सामने सहज हो जाएंगे, तो बाहर की दुनिया में भी कॉन्फिडेंस अपने आप दिखने लगेगा। यह अभ्यास आपको आत्मविश्वास से भरी बातचीत की आदत डालने में मदद करेगा।
नजरें हटाना भी है जरूरी
आई कॉन्टैक्ट का मतलब घूरना नहीं होता। यदि आप महसूस करें कि सामने वाला असहज हो रहा है या आपको खुद को रिलैक्स करने की जरूरत महसूस हो रही है, तो कुछ सेकंड के लिए अपनी नजरें हटा लें और फिर दोबारा सामने देखें। यह छोटा सा ब्रेक आपको कूल रहने में मदद करेगा और बातचीत को और स्वाभाविक बनाएगा। आंखों में आंखें डालकर बात करना आपकी बॉडी लैंग्वेज को और भी प्रभावशाली बना सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है थोड़ी सी प्रैक्टिस। अपनी बातचीत में इन ट्रिक्स को धीरे-धीरे अपनाएं और देखिए कैसे आपका आत्मविश्वास बढ़ता है। याद रखें, यह आदत समय ले सकती है, लेकिन अगर आप रोज़मर्रा की बातचीत में इन छोटी-छोटी आदतों को शामिल करेंगे, तो आपकी आंखें आपकी बातों से कहीं ज्यादा असरदार साबित होंगी।
