मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, सर्वांगपुष्टि आसन एक सरल लेकिन प्रभावी योगासान है। यह पूरे शरीर को सक्रिय कर मांसपेशियों की ताकत, रक्त संचार और स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, जिससे कमर और पीठ दर्द में राहत मिलती है।
सर्वांगपुष्टि आसन पूरे शरीर की मांसपेशियों को टोन करता है, खासकर पेट, कमर और पैरों की चर्बी घटाने में मदद करता है। बेहतर रक्त संचार के कारण शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति बढ़ती है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है और इम्यूनिटी मजबूत होती है। इसके अलावा, मोटापा, कब्ज और शारीरिक दुर्बलता जैसी समस्याओं में सुधार आता है।
बच्चों और युवाओं में हाइट और शारीरिक विकास को बढ़ावा देने में भी यह आसन सहायक है। जोड़ों की जकड़न दूर होती है, लचीलापन बढ़ता है और थकान एवं तनाव कम होकर ऊर्जा का स्तर बनाए रहता है।
हालांकि, इसे करते समय सावधानी बरतना जरूरी है। गर्दन, पीठ या कंधे में चोट, उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, गंभीर हृदय रोग या हाल ही में सर्जरी हुई हो तो यह आसन न करें। गर्भवती महिलाएं और पीरियड्स के दौरान भी इसे टालें। शुरुआत में अभ्यास को ज्यादा लंबा न रखें, सांस पर ध्यान दें और खाली पेट या हल्के व्यायाम के बाद ही करें। असुविधा या चक्कर आने पर तुरंत रुक जाएं।
सर्वांगपुष्टि आसन शरीर को मजबूत बनाता है, सुस्ती दूर करता है और मानसिक ऊर्जा बढ़ाता है। रोजाना 10 मिनट का नियमित अभ्यास आधुनिक जीवन की चुनौतियों से निपटने और स्वास्थ्य को संतुलित रखने का सरल और प्रभावी तरीका है।
