पानी से होली खेलने की मनाही
चंद्रमा को जल का कारक माना जाता है, इसलिए इस वर्ष ग्रहण के दौरान पानी से होली खेलना वर्जित है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि जल का उपयोग करने से मानसिक अशांति और नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। अत: इस बार गुलाल से ही होली खेलना शुभ रहेगा, जबकि पानी से होली खेलना टालना चाहिए।
गैर निकाले जा सकेंगे, लेकिन…
ग्रहण के दिन गैर (पारंपरिक लोकनृत्य) निकालने की परंपरा भी जारी रहेगी, लेकिन यह सिर्फ सूखा और गुलाल का ही इस्तेमाल करके किया जाएगा। उज्जैन और राज्य के अन्य हिस्सों में यह परंपरा बनाये रखने की मान्यता है। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बेवाला के अनुसार, परंपरागत गैर निकाले जाने से कोई दोष नहीं लगता, बशर्ते यह एक प्रहर (लगभग तीन घंटे) के भीतर किया जाए।
भद्राकाल में होगा होलिका दहन
2 मार्च की रात को होलिका दहन होगा, लेकिन इस बार भद्राकाल (शाम 5:55 से रात 4:28 तक) के प्रभाव में यह किया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि प्रदोष काल में होलिका पूजन सबसे श्रेष्ठ होगा, साथ ही इस समय दान-पुण्य भी किए जा सकते हैं, जो इस दिन की महिमा को बढ़ाते हैं।
ग्रहण और सूतक काल का समय
सूतक काल: ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू होता है, यानी सुबह 6:47 बजे से।
ग्रहण का समय: 3:19 बजे से 6:47 बजे तक।
इस दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित माना जाता है और मंदिरों के पट बंद रखे जाते हैं।
राशियों पर ग्रहण का प्रभाव
ग्रहण का राशियों पर भी खास असर होगा:
मेष: अनुकूल रहेगा, मित्रों से सहायता मिलेगी।
वृषभ: प्रयास बढ़ाने होंगे, विशेष ध्यान दें।
मिथुन: वाणी और क्रोध पर संयम जरूरी।
कर्क: जलीय राशि होने के कारण लाभ की संभावना।
सिंह: कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर से पहले सावधानी बरतें।
कन्या: नई नौकरी और व्यापार में अवसर मिल सकते हैं।
तुला: विशेष व्यक्ति से सहयोग मिलेगा।
वृश्चिक: भूमि भवन से जुड़ा कोई काम हो सकता है।
धनु: नए कार्यों की शुरुआत संभव।
मकर और कुम्भ: न्यायिक दृष्टि से अनुकूल समय।
मीन: धार्मिक कार्यों में सफलता मिलेगी।
सूतक काल में क्या करें और क्या न करें?
भोजन: 6:30 बजे से 9:30 बजे तक बुजुर्ग और मरीज भोजन कर सकते हैं।
पूजा-अर्चना: ग्रहण के दौरान संयम रखकर भजन-पूजन करें। विशेष रूप से ग्रहण के समय और सूतक काल में ध्यान रखें कि कोई भी शुभ कार्य न करें।
इस वर्ष के ग्रहण और होली का समय परंपरा और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बहुत ही विशेष है। जल से होली न खेलने का कारण यह भी है कि इस दिन चंद्रमा को जल का कारक माना जाता है, और इससे कुछ नकारात्मक असर हो सकता है। इस बार सिर्फ गुलाल से होली खेलना ही शुभ रहेगा।
