नई दिल्ली । गरुड़ पुराण के अनुसार घर में बेटी का जन्म केवल एक शारीरिक घटना नहीं बल्कि यह पिछले जन्मों के अच्छे कर्मों और परिवार के भाग्य का परिणाम होता है। इस पुराण के अनुसार, अगर किसी परिवार में बेटी का जन्म होता है तो यह संकेत होता है कि उस परिवार में माता लक्ष्मी का वास है, और यह घर सात्विकता, प्रेम और पुण्य से परिपूर्ण होता है।
जब अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा कि किन घरों में कन्या का जन्म होता है तो भगवान श्री कृष्ण ने उत्तर दिया कि यदि किसी घर में पुत्र का जन्म होता है तो यह उसका भाग्य है लेकिन यदि पुत्री का जन्म होता है तो वह उस घर का सौभाग्य होता है। यानी बेटे का जन्म भाग्य से निर्धारित होता है परंतु बेटी का जन्म एक विशेष सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
गरुड़ पुराण में यह भी बताया गया है कि एक घर में बेटी का जन्म उसी परिवार में होता है जहाँ शुद्धता सात्विकता और प्रेम का वातावरण होता है। यह घर अपने अच्छे कर्मों के कारण इस पुण्य लाभ को प्राप्त करते हैं।दूसरी ओर यह भी माना जाता है कि एक घर में जहां बेटी का जन्म होता है, वहां परिवार को आर्थिक समृद्धि सुख-शांति और सुखी जीवन का आशीर्वाद मिलता है। इसीलिए भारत में प्राचीन समय से ही बेटी को लक्ष्मी का रूप माना जाता है।
कहा जाता है कि भाग्य से बेटे होते हैं, लेकिन सौभाग्य से बेटियां होती हैं। यह कहावत इस बात को पूरी तरह से व्यक्त करती है कि बेटियां घर में आने से न केवल परिवार को मानसिक शांति मिलती है, बल्कि एक प्रकार का आत्मिक शुद्धिकरण भी होता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, कन्या का जन्म उस परिवार में होता है जहाँ पूर्वजन्मों के पुण्य और अच्छे कर्म होते हैं। यह परिवार अपने कर्मों के कारण ही इस सौभाग्य को प्राप्त करता है और ऐसे घरों में माता लक्ष्मी का आशीर्वाद भी होता है।
इस पुराण के अनुसार, एक बेटी का जन्म घर में खुशियाँ और समृद्धि लेकर आता है। यह दर्शाता है कि जीवन का असली सुख केवल भौतिक संपत्ति में नहीं, बल्कि मानसिक शांति, प्रेम, और सौभाग्य में छिपा होता है। इस प्रकार, गरुड़ पुराण के उपदेशों को समझकर हम यह जान सकते हैं कि बेटियों का जन्म एक भाग्यशाली और पवित्र घटना है। यह समाज के लिए एक संदेश है कि हमें बेटियों को समान सम्मान और प्रेम देना चाहिए, क्योंकि वे न केवल हमारे जीवन में खुशियाँ लाती हैं, बल्कि हमारे कर्मों का फल भी होती हैं।
