बसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व
पारंपरिक मिठाइयों का भोग
केसरिया चावल के अलावा इस दिन पीली बूंदी के लड्डू, मालपुआ, और बेर जैसे मौसमी फलों का भी भोग अर्पित किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, पीली बूंदी के लड्डू अर्पित करने से वाणी में मधुरता और मानसिक एकाग्रता बढ़ती है। वहीं, मालपुआ को खासकर उत्तर भारत में देवी सरस्वती को अर्पित किया जाता है, जो खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बेर जैसे मौसमी फलों का भोग भी विशेष रूप से प्रिय माना जाता है, और यह देवी को अर्पित करने के बाद ही खाने की सलाह दी जाती है।
सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक स्पष्टता के लिए भोग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सही भोग अर्पित करने से कई लाभ मिलते हैं। विशेष रूप से, पीले फल और मिठाइयों का अर्पण मानसिक स्पष्टता और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है। सफेद चंदन, पीले फूल, और मिश्री का भोग नकारात्मक ऊर्जा को कम करने और घर में शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है। वहीं, शहद का भोग अर्पित करने से वाणी दोष दूर होते हैं और बोलचाल में मधुरता आती है।
2026 में बसंत पंचमी शुक्रवार को
इस बार, 2026 में बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है, जो विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिन लक्ष्मी जी का भी दिन माना जाता है। इस दिन, मां सरस्वती को भोग लगाने के बाद, विशेष रूप से जरूरतमंद बच्चों में पढ़ाई की सामग्री और पीले रंग की खाने की चीजें बांटना बहुत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस प्रकार का दान न केवल विद्या में सफलता दिलाता है, बल्कि आर्थिक बाधाओं को भी दूर करता है।
