2 मार्च: भद्रा पुच्छ में ही होगा होलिका दहन
भद्रा का लंबा साया 2 मार्च की शाम 5:18 बजे से लेकर पूरी रात और अगले दिन 3 मार्च की भोर सुबह 4:56 बजे तक भद्रा का वास रहेगा। शास्त्रों में भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है क्योंकि इससे राज्य और व्यक्ति पर अशुभ प्रभाव पड़ते हैं।
शुभ मुहूर्त का चयन ऐसी स्थिति में जब पूरी रात भद्रा हो तो शास्त्रों में भद्रा पुच्छ भद्रा का पूंछ वाला भाग में कार्य करने का विधान है। पं. नरेंद्र उपाध्याय जी के अनुसार इस साल दहन का सबसे शुभ समय यह रहेगा
शुभ मुहूर्त: रात 12:50 बजे से रात 02:02 बजे तक अवधि: 1 घंटा 12 मिनट
इसी समय में दहन करना शास्त्रीय दृष्टि से सबसे उत्तम और कल्याणकारी है। 3 मार्च: होली पर चंद्र ग्रहण का पहरा 3 मार्च मंगलवार को पूर्णिमा तिथि के दिन ही साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा इसलिए इसका धार्मिक प्रभाव सूतक भी पूरे देश में मान्य होगा। ग्रहण की टाइमिंग भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण दोपहर लगभग 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा। इस ग्रहण के दौरान ब्लड मून का नजारा भी देखने को मिल सकता है।
सूतक काल और नियम चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। इसका मतलब यह है कि 3 मार्च को सुबह 06:20 बजे से ही सूतक लग जाएगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। इस दौरान पूजा पाठ मूर्ति स्पर्श और खाना पीना वर्जित होता है। सूतक और ग्रहण के साये में होली का डंडा या रंग गुलाल खेलना अशुभ माना जाता है इसलिए 3 मार्च को रंग वाली होली नहीं मनाई जाएगी।
4 मार्च: रंगों की होली धुलेंडी का असली उत्सव 3 मार्च की शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद शुद्धिकरण और स्नान किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 4 मार्च 2026 बुधवार को सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि रहेगी। शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार ग्रहण और सूतक से मुक्त होने के बाद इसी दिन पूरे देश में धूम धाम से धुलेंडी और रंगों का त्योहार मनाया जाएगा।
होली 2026: पूरा कैलेंडर
3 मार्च मंगलवार चंद्र ग्रहण दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक
3 मार्च मंगलवार सूतक काल सुबह 06:20 बजे से शुरू
4 मार्च बुधवार रंग वाली होली सुबह से धुलेंडी का असली दिन
ग्रहण के दौरान सावधानियां और उपाय
