नवरात्रि के दिनों में घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाना बेहद शुभ माना जाता है। हिंदू परंपरा में तोरण को मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि आम के पत्तों का तोरण लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश रुक जाता है। इसके साथ ही मुख्य द्वार को नियमित रूप से साफ रखना और उसे सजाकर रखना भी जरूरी माना जाता है क्योंकि स्वच्छता को भी शुभता का प्रतीक माना जाता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार नवरात्रि के दौरान स्नान के बाद मुख्य द्वार के दोनों ओर कुमकुम या हल्दी से स्वास्तिक का चिन्ह बनाना भी अत्यंत शुभ होता है। स्वास्तिक को सनातन परंपरा में मंगल सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही एक ओर शुभ और दूसरी ओर लाभ लिखने की परंपरा भी है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और परिवार में सुख समृद्धि का वातावरण बनता है।
नवरात्रि के नौ दिनों में मुख्य द्वार के अंदर की ओर आते हुए माता लक्ष्मी के छोटे छोटे चरण चिह्न बनाना भी शुभ माना जाता है। यह प्रतीकात्मक रूप से इस बात का संकेत देता है कि घर में धन सौभाग्य और समृद्धि का आगमन हो रहा है। कई लोग चावल के आटे कुमकुम या रंगोली से ये चरण चिह्न बनाते हैं जिससे घर का वातावरण और भी पवित्र और आकर्षक बन जाता है।
इसके अलावा वास्तु शास्त्र में एक और सरल उपाय बताया गया है। एक तांबे के बर्तन में साफ पानी भरकर उसमें गुलाब की पंखुड़ियां डालकर मुख्य द्वार के पास रखना शुभ माना जाता है। गुलाब की सुगंध और जल दोनों मिलकर वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और घर में शांति तथा सुख का भाव बढ़ाते हैं।
नवरात्रि के दौरान सूर्यास्त के बाद मुख्य द्वार के पास घी का दीपक जलाने की परंपरा भी बहुत शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपक का प्रकाश नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर में दिव्यता तथा सकारात्मकता का वातावरण बनाता है। कहा जाता है कि जब घर का मुख्य द्वार शुभ प्रतीकों दीपक की रोशनी और स्वच्छता से सुसज्जित रहता है तो वहां मां दुर्गा और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और परिवार में सुख शांति तथा समृद्धि का वास होता है।
