सबसे पहले त्वचा की सुरक्षा का ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार होली खेलने से पहले चेहरे और शरीर पर नारियल तेल या मॉइस्चराइज़र लगाना चाहिए। यह एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करता है और रंगों को सीधे त्वचा से संपर्क करने से रोकता है। बाद में रंग आसानी से साफ भी हो जाते हैं। जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है, उन्हें हर्बल या प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करना चाहिए। केमिकल युक्त रंगों से त्वचा में जलन, एलर्जी और रैशेज जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
आंखों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि होली खेलते समय चश्मा पहनना या आंखों को रंग से बचाना चाहिए। यदि रंग आंखों में चला जाए तो तुरंत साफ पानी से धोएं और जलन बनी रहने पर चिकित्सक से सलाह लें। बच्चों के साथ होली खेलते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है क्योंकि उनकी त्वचा और आंखें संवेदनशील होती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ पानी और भोजन की सुरक्षा पर भी जोर देते हैं। होली के दौरान शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना जरूरी है। बाहर मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। स्वच्छ और घर का बना भोजन ही प्राथमिकता होनी चाहिए। यह न केवल पेट को सुरक्षित रखता है बल्कि संक्रमण के जोखिम को भी कम करता है।
इसके अलावा, सुरक्षित होली खेलने के लिए कपड़ों और पर्यावरण का भी ध्यान रखना आवश्यक है। पुराने कपड़े पहनें जिन्हें रंग लगने पर फेंका जा सके। प्राकृतिक और इको-फ्रेंडली रंगों का इस्तेमाल करें ताकि त्वचा और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहें। पानी का अत्यधिक उपयोग न करें और आसपास के लोगों की सहमति के बिना रंग न डालें।
विशेषज्ञों का कहना है कि सावधानी और संयम के साथ खेली गई होली ही सबसे आनंददायक होती है। थोड़ी सी तैयारी और सुरक्षा के उपाय अपनाकर लोग त्योहार का भरपूर मज़ा ले सकते हैं। घर पर बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करें और उन्हें हर्बल रंगों के महत्व के बारे में बताएं।
इस तरह होली न केवल उमंग और उत्साह का त्योहार बनी रहती है बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी सुरक्षित और सुखद अनुभव बनती है। इस बार त्योहार के रंगों में सुरक्षा और आनंद दोनों का संगम सुनिश्चित करें और सभी के लिए खुशियाँ और उत्साह फैलाएं।
