वास्तु सिद्धांतों के अनुसार किसी भी घर में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का संतुलन बेहद जरूरी है। उत्तर और पूर्व दिशा से आने वाली रोशनी को विशेष रूप से शुभ माना गया है। इन दिशाओं में बनी खिड़कियां सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं और घर में स्थिरता, शांति व सक्रियता बनाए रखने में मदद करती हैं। सुबह की धूप यदि पूर्व दिशा की खिड़की से घर में प्रवेश करे, तो यह मानसिक स्पष्टता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है।इसके विपरीत, कुछ दिशाओं में खिड़कियों की अधिकता वास्तु असंतुलन का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण दिशा की खिड़कियों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि इस दिशा में खिड़की हो, तो उसे हमेशा साफ-सुथरा और नियंत्रित रखना जरूरी माना जाता है। टूटी, गंदी या लंबे समय तक खुली रहने वाली खिड़कियां नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं, जिससे घर के सदस्यों के बीच तनाव और असहजता बढ़ सकती है।
खिड़कियों के खुलने की दिशा भी वास्तु में महत्वपूर्ण मानी गई है। भीतर की ओर खुलने वाली खिड़कियां घर के अंदर सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने का संकेत देती हैं, जबकि बाहर की ओर खुलने वाली खिड़कियां ऊर्जा के प्रवाह में बाधा पैदा कर सकती हैं। इसी तरह, खिड़कियों से आने वाली तेज हवा, शोर या असंतुलित प्रकाश भी घर के वातावरण को प्रभावित करता है। इसलिए खिड़कियों पर हल्के परदे या ब्लाइंड्स का उपयोग संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास खिड़कियों की स्थिति को लेकर भी वास्तु में खास ध्यान देने की सलाह दी जाती है। दरवाजे के दोनों ओर यदि समान आकार और समान ऊंचाई की खिड़कियां हों, तो इससे ऊर्जा का प्रवाह संतुलित बना रहता है। इसके अलावा, खिड़कियों की संख्या भी वास्तु संतुलन से जुड़ी होती है। मान्यताओं के अनुसार सम संख्या में खिड़कियां घर में स्थिरता और सामंजस्य को दर्शाती हैं।वास्तु विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आधुनिक जीवनशैली और फ्लैट संस्कृति में हर नियम का शत-प्रतिशत पालन संभव नहीं होता। ऐसे में सबसे जरूरी है संतुलन और साफ-सफाई। खिड़कियों की नियमित सफाई, पर्याप्त रोशनी और सही दिशा में खुलने वाली संरचना घर के माहौल को सकारात्मक बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। छोटे-छोटे सुधार भी लंबे समय में बड़े बदलाव ला सकते हैं।
