
श्रीकृष्ण जैसा अद्भुत अलौकिक चरित्र दूसरा नहीं मिलता है, इसलिए किन्हीं भी परिस्थिति में कोई भी सांसारिक घटना हो, जिसमें लोग विषाद में हो, संकट में , अपना दुख व्यक्त कर रो रहा हो, या स्वयं उन्हें संकट में डालने की धमकी दे रहा हो, वे सदैव निर्द्वन्द्व इस संसार के रंगमंच पर हॅसते हुए अपनी मुस्कान बिखेरे दिखाई देते है। इस जगत में जहां सुख में, खुशी में लोग मुस्कुराते है, दुख में, विवाद में , संकट में रोते है किन्तु कृष्ण गजब के है वे विपत्तियों के घने बादल घिर आने पर घोर अंधकार में अपनी मुस्कान की बिजली गिरा के समाज को अचंभित करते है। जगत की हर घटना में शामिल होकर शामिल न रहना उनका व्यक्तित्व रहा है और चेहरे पर आने वाली मुस्कान अपने आप में अद्वितीय रही है जो भी उनकी मुस्कान का साक्षी रहा उन्हें लगा कि बचपन में जो माॅ यशोदा के यहां छाछ-मक्खन खाया है वह मिठास उनके हृदय से आनन्द का सागर बनकर हिलोरे मार रही है।
वासुदेव की आज्ञा से कंस का निमंत्रण लेकर अक्रूर जी नंद बाबा के महल में आकर कृष्ण को मथुरा ले जाने की बात कर रहस्योदघाटन करते है कि कृष्ण वासुदेव पुत्र है, उनका पुत्र नहीं, यह हृदय चीरने वाले कठोर सत्य को जानकर नन्दबाबा एवं यशोदा पर वज्रपात होता है किन्तु तब भी कृष्ण मुस्कुराते हुए नन्दबाबा को ज्ञान देकर अपने कर्तव्य पालन की सीख देते है। अक्रूर जी कृष्ण की सुरक्षा को लेकर चिंतित है तब उन्हें अपने दिव्य स्वरूप के दर्शन करा उनकी चिंता का निराकरण करते समय मुस्कुराते रहते है। कंस की रंगशाला में जाते समय अपने बल के नशे में चूर कुवलयापीड को खडा देख मुस्कुराते है और साथ ही मुष्टक और चाणूर से भिड़कर उन्हें हँसी-मजाक में खेल खेल में यमपुर पहुँचा देते है। कंस की छाती पर सवार हो हॅसते हुए पूछते हो कहो मामा अब तक की सारी कसर निकाल लॅू और कंस का खेल समाप्त करते है।
कृष्ण का हॅसना मुस्कुराना अपने आप में रहस्य है जिसे समझ पाना किसी के लिए भी संभव नहीं है फिर बड़े भाई बलराम भी कैसे समझ सकते है। बलराम अपनी बहन सुभद्रा का हाथ दुर्योधन के हाथों में देने का निर्णय लेते है जबकि सुभद्रा को अर्जुन से प्रेम था जिसे कृष्ण जानते थे और उन्होंने अर्जुन को सुभद्रा के हरण के लिए प्रोत्साहित किया ,इशारा पाकर अर्जुन सुभद्रा को लेकर भाग जाते है जिसे जानते समझते हुए कृष्ण मुस्कुराते रहते है, यादव सेना इधर-उधर भागमभाग करती है, बलराम कृष्ण से अर्जुन पर हमला करने का कहते है किन्तु वे मुस्कुराते है और जब बलराम को पता चलता है कि सुभद्रा ही रथ चलाते हुए अर्जुन को ले गयी तब बलराम जी भी सच जानकर कृष्ण पर लाल-पीले हो खरी-खरी सुनाने से नहीं चूकते और कृष्ण उनकी बातंें सुनकर मुस्कुराकर रह जाते है। धूर्त क्रीडा में पाण्डव सब दाव पर लगा देते है तब दूर्योधन मूछों पर ताव देकर दुशासन को आदेश देकर द्रोपदी को सभा में खींचकर लाने को कहता है, शकुनी और कर्ण ठहाके लगाते है। दुशासन की बलशाली भुजाए द्रोपदी को निवस्त्र करने में शिथिल हो जाती है किन्तु कृष्ण भरी सभा में मुस्कुराते हुए उसका चीर बढ़ाने की लीला करते है।
कुरूक्षेत्र में अर्जुन दोनों सेनाओं के बीच अपना रथ खड़ाकर मोहग्रस्त होकर युद्ध से इंकार कर देता है तब मोहग्रस्त अर्जुन का मोहभंग मुस्कुराते हुए कृष्ण उसके सभी प्रश्नों का समाधान कर युद्ध के लिए तैयार करते है। भीष्म युद्ध में महाप्रलय मचाने लगे तब भक्त प्रणपालक बन कृष्ण क्रोधित होने का अभिनय कर चक्र लिए भीष्म की ओर दौड़ते है,तब भीष्म निशस्त्र होकर विनती कर शस्त्र न उठाने की उनकी प्रतिज्ञा को तोड़े जाने को अपना मान बढ़ाये जाने पर उनसे विनती करते है तब वे चुपचाप मुस्कुराते हुए रथ पर लाॅट आते है। अर्जुन अपने पुत्र अभिमन्य के वध पर विलाप करते है तब वे मुस्कराकर समझाते है तुम किसके लिए रो रहे हो, अभिमन्यु अपने को सुयोग्य माता पिता का सुयोग्य पुत्र होना सिद्ध कर गया और तुम्हारे यश,कीर्ति को सारे जगत में धवलित कर गया। वही सुभद्रा छाती पीटकर रोती है तो उसे हंसकर कहते है तुम्हें ऐसा वीर पुत्र को जन्म देने पर गर्व करना चाहिए, छत्राणी इसी दिन के लिए पुत्र को जन्म देती है। कृष्ण का इस कठिन दुख की परिस्थितियों में मुस्कुराकर ज्ञान-वैराग्य का संदेश देना अपने आप में रहस्य पैदा करता है। घटोत्कच के मारे जाने पर भीम शोक से चीत्कार मारकर रोने लगा तब कृष्ण मुस्कुराने लगे, जिसे देख भीम कुपित हुए कि मेरा प्यारा बेटा मारा गया और तुम हँस रहे हो, इस पर कृष्ण ने भीम को आश्वस्त कर कहा, क्यों बेकार बालक की तरह बिलख बिलख कर रो रहे हो? क्या तुम्हारे लिए अर्जुन से बढ़कर घटोत्कच था? इस महत्वपूर्ण समय में तुम्हारा बेटा अर्जुन की ढाल बनकर सच्चा बेटा साबित हुआ है। घटोत्कच के वीरगति पर कायर की तरह इतना दुख करेंगे? इन्द्र प्रदत्त कर्ण की शक्ति यदि आज अर्जुन पर समाप्त करता तो क्या घटोत्कच को देखकर तुम्हें संतोष होता?रोना धोना छोड़ो अर्जुन के प्राण बच गये, इसके लिए खुशियाॅ मनाओं।
श्रीजगन्नाथधाम, काली मंदिर के पीछे, ग्वालटोली,
नर्मदापुरम मध्यप्रदेश मोबाईल 9993376616ें
