हृदय, पाचन और श्वसन के लिए फायदेमंद
माणिक्य भस्म का प्रयोग हृदय संबंधी विकार, अल्पशुक्राणुता, पाचन दोष, सांस संबंधी रोग और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में इसे वात और कफ दोष को संतुलित करने वाला माना गया है। जब शरीर में इन दोषों की अधिकता होती है, तो सर्दी, जुकाम, बुखार, पेट में अल्सर और गर्मी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। माणिक्य भस्म का सेवन इन सभी समस्याओं को कम करने में मदद करता है।
त्वचा और चेहरे की सुंदरता में लाभकारी
माणिक्य भस्म चेहरे की चमक वापस लाने में भी सहायक है। इसका सेवन और लेपन चेहरे के ओज को बढ़ाता है, त्वचा की खुजली, जलन, एलर्जी जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। समय से पहले झुर्रियों या बुजुर्ग दिखने की समस्या में यह संजीवनी साबित हो सकता है।
माणिक्य भस्म का निर्माण और सेवन
भस्म बनाने में शुद्ध माणिक्य, पारा, ऑर्पिमेंट और आर्सेनिक सल्फाइड का इस्तेमाल होता है। सामग्री को कई बार शोधन करके सुरक्षित बनाया जाता है। इसे चिकित्सक की सलाह और वजन के अनुसार ही लेना चाहिए। पीलिया, काला बुखार, बार-बार पेशाब आना या अन्य मूत्र संबंधी बीमारियों में माणिक्य भस्म औषधि की तरह काम करता है और कई दिनों में लाभ दिखाता है।
संजीवनी गुणों की भरमार
माणिक्य भस्म का नियमित और चिकित्सकीय सेवन रक्त शुद्ध करता है, पेट संबंधी विकार ठीक करता है, ऊर्जा और मानसिक क्षमता बढ़ाता है। आयुर्वेद में इसे संजीवनी के रूप में माना गया है, जो शरीर और मन दोनों को संतुलित रखता है।
