वास्तु विशेषज्ञ कुछ पौधों को विशेष रूप से उपयोगी मानते हैं। मोटे पत्तों वाला क्रासुला पौधा आर्थिक संतुलन से जुड़ा माना जाता है। इसे उत्तर-पूर्व या इसके आसपास रखने से घर में खर्च और आय के बीच संतुलन बन सकता है। अपराजिता का पौधा धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है और इसे रखने से मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास बढ़ता है।मोगरे जैसे खुशबूदार पौधे घर के वातावरण को शांत रखते हैं और तनाव कम करने में सहायक होते हैं। शमी का पौधा अनुशासन और धैर्य का प्रतीक माना जाता है। इसे सही दिशा में रखने से घर में नकारात्मकता कम होती है। वहीं, गेंदे के फूल सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक हैं। वास्तुशास्त्र के अनुसार इसके फूल घर के वातावरण को हल्का और प्रसन्न बनाते हैं।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है। पौधों की नियमित देखभाल, पर्याप्त धूप और स्वच्छ मिट्टी जरूरी है। सूखे या खराब पौधे ऊर्जा को बाधित कर सकते हैं। इसके अलावा उत्तर-पूर्व दिशा में भारी फर्नीचर या अव्यवस्था से बचना चाहिए। घर का यह क्षेत्र हमेशा हल्का खुला और साफ-सुथरा होना चाहिए।हाल के वर्षों में ग्रीन वास्तु की अवधारणा लोकप्रिय हुई है। अब लोग पौधों को सिर्फ सजावट के लिए नहीं बल्कि ऊर्जा संतुलन के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पौधों के साथ जीवनशैली में भी संतुलन रखा जाए, तो इसके सकारात्मक परिणाम लंबे समय तक बनाए रखे जा सकते हैं।
हालांकि, किसी भी वास्तु उपाय को अपनाने से पहले व्यक्तिगत परिस्थितियों, घर के आकार और परिवार की आवश्यकताओं को ध्यान में रखना जरूरी है। सही दिशा में पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने से घर का माहौल न केवल स्वस्थ और शांत रहेगा बल्कि आर्थिक और मानसिक स्थिरता भी बढ़ेगी।इस प्रकार उत्तर-पूर्व दिशा में हरियाली का संतुलित उपयोग आधुनिक शहरी घरों में न सिर्फ सौंदर्य बढ़ाता है बल्कि घर की सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का माध्यम भी बन सकता है।
