नई दिल्ली । सनातन धर्म में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ या संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा और उपवास से जुड़ा हुआ है जिसे विघ्न विनाशक और सुख-समृद्धि के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश का पूजन करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
सकट चौथ का महत्व
सकट चौथ को खासतौर पर माताएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र और कल्याण के लिए रखती हैं। यह दिन गणेश जी की कृपा प्राप्त करने और जीवन में खुशहाली लाने का प्रमुख अवसर होता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन उपवास करने से न केवल घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है बल्कि हर प्रकार के संकटों से मुक्ति भी मिलती है।
तिथि और समय
तिथि और समय
दृक पंचांग के अनुसार इस साल संकष्टी चतुर्थी 6 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 6 जनवरी को सुबह 8 बजकर 1 मिनट से शुरू होगी और 7 जनवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इस दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 54 मिनट पर होगा जो व्रत के पूर्ण होने का संकेत है।
व्रत का तरीका
सकट चौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है। कई भक्त इस दिन निर्जला उपवास रखते हैं जबकि कुछ हल्का सात्विक भोजन करते हैं। व्रत के लिए सबसे पहले प्रात काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दिनभर भगवान गणेश का स्मरण करते हुए उनका पूजन करें।
पूजन विधि
शाम के समय चंद्रमा के दर्शन से पहले भगवान गणेश की पूजा विधिपूर्वक करें। सबसे पहले गणेश जी का पंचामृत से स्नान कराएं फिर घी और सिंदूर का लेप लगाएं। इसके बाद जनेऊ रोली इत्र दूर्वा फूल चंदन अबीर लौंग चढ़ाकर भगवान गणेश को धूप-दीप दिखाएं।गणेश जी को तिल-गुड़ के लड्डू मोदक और तिलकुट का भोग अर्पित करें। यह भगवान गणेश को अत्यधिक प्रिय है। पूजा के बाद गणेश जी के सामने गं गण गणपतये नमः मंत्र का जाप करें और गणेश स्तोत्र या अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
चंद्रोदय पर अर्घ्य देना
चंद्रमा के दर्शन के बाद चंद्रोदय के समय चंद्रमा को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें। इस समय दिए गए अर्घ्य से व्रत पूरा होता है और भक्तों को संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। इसके बाद व्रत का पारण करें और प्रसाद ग्रहण करें।
पूजन से लाभ
पूजन से लाभ
सकट चौथ का व्रत विशेष रूप से संतान सुख और परिवार की समृद्धि के लिए रखा जाता है। साथ ही इस दिन किए गए पूजा से भगवान गणेश की कृपा से घर में शांति और सुख-समृद्धि आती है। भक्तों का मानना है कि इस दिन किए गए व्रत से हर प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन में सफलता और खुशी का वास होता है।
व्रत कथा
सकट चौथ पर पूजा के साथ-साथ व्रत कथा पढ़ना या सुनना भी बेहद महत्वपूर्ण है। कथा में भगवान गणेश के अनेक भक्तों की श्रद्धा और उनकी आस्था के किस्से बताए जाते हैं जो संकटों से उबरकर भगवान गणेश की कृपा से जीवन में सुख-शांति लाए सकट चौथ जिसे संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है भगवान गणेश की पूजा करने और उपवास रखने का एक विशेष दिन है। इस दिन व्रत और पूजा करने से न केवल जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है बल्कि परिवार में खुशहाली और सुख-समृद्धि भी आती है। यह पर्व विशेष रूप से माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो अपने पुत्रों की लंबी उम्र और सुख-शांति की कामना करती हैं।
