धमकी मिलते ही पीड़ित परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अस्पताल परिसर और परिवार की सुरक्षा बढ़ा दी है। किशनगंज थाना पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी पूरे घटनाक्रम की जांच में जुट गए हैं। फोन कॉल की लोकेशन नंबर की जांच और साइबर सेल की मदद से तकनीकी पड़ताल शुरू कर दी गई है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कॉल वाकई गैंग से जुड़ा है या किसी ने नाम का इस्तेमाल कर दहशत फैलाने की कोशिश की है। कई बार अपराधी किसी बड़े गिरोह का नाम लेकर भय फैलाते हैं ताकि उनकी धमकी का असर बढ़ सके। इसी वजह से पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अलर्ट मोड पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
महू और इंदौर पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी है। साथ ही अस्पताल और परिवार के साथ जुड़े अन्य लोगों की भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। पुलिस का कहना है कि यदि कॉल करने वाला असली गिरोह से जुड़ा निकला तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना स्थानीय समुदाय में डर और चिंता फैलाने वाली है क्योंकि अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के संचालक और परिवार को ही निशाना बनाया गया। ऐसे मामलों में समय पर पुलिस की सक्रियता और तकनीकी जांच ही सुरक्षा और न्याय की दिशा तय करती है।
आगे की जांच में यह भी सामने आएगा कि धमकी देने वाले का मकसद सिर्फ फिरौती था या किसी और उद्देश्य से परिवार को डराना था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपी की पहचान के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
