उनके परिजन और आसपास मौजूद श्रद्धालु तुरंत मदद के लिए आगे बढ़े। रिश्तेदार संतोष सोनी ने बताया कि वे सुबह समय पर कथा स्थल पहुंचे थे और महिला के अचेत होने पर उन्होंने CPR देने की कोशिश की, लेकिन पुष्पा देवी के मुंह से झाग निकलने लगा। तुरंत उन्हें कथा परिसर में बने अस्थायी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुष्पा देवी लंबे समय से दिल की बीमारी से जूझ रही थीं। लगभग दो साल पहले उन्हें गंभीर समस्या हुई थी, जिसके बाद से उनका इलाज चल रहा था। बीमार होने के बावजूद वह भगवान शिव के प्रति अपनी गहरी आस्था के कारण डबरा आई थीं और अपने रिश्तेदारों के यहां ठहरकर कथा में भाग ले रही थीं। वह अपनी ननद के साथ इटावा से आई थीं और सराफा बाजार स्थित रिश्तेदारों के घर में रुकी हुई थीं।
पंडित प्रदीप मिश्रा के अनुसार, भगवान को खोजने की जरूरत नहीं है, वह आपके हृदय में हैं। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर बाबाओं के चक्कर में पड़ते हैं कि भगवान से मिलवा दो, जबकि प्रभु तो आपके अंदर हैं। इस कथा का आयोजन नवग्रह पीठ प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत किया जा रहा था और यह 14 से 16 फरवरी तक चलने वाली थी। शुक्रवार को पंडित मिश्रा की कथा का अंतिम दिन था।
पुष्पा देवी की मृत्यु के बाद कथा स्थल पर भारी शोक का माहौल बन गया। ग्रामीण अंचल की महिलाओं में आने का सिलसिला प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। डबरा के एएसपी जयराज कुबेर ने बताया कि व्यवस्था बनाने में पुलिस जुटी हुई है और रेलवे पुलिस भी मुस्तैद है। दो स्पेशल ट्रेनें प्लेटफॉर्म पर खड़ी हैं, जिनमें से एक ग्वालियर की ओर और दूसरी झांसी की ओर जा रही है।
यह घटना डबरा में नवग्रह मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के पहले ही दिन 10 फरवरी को हुई भगदड़ की याद दिला देती है, जिसमें 70 वर्षीय रति साहू की मौत हो गई थी और बच्ची समेत आठ लोग घायल हुए थे। भगदड़ तब मची थी जब कलश यात्रा से पहले पुलिसकर्मियों ने अचानक स्टेडियम का गेट खोल दिया, जिससे भीड़ बेकाबू हो गई थी। रति साहू की बहू ने पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठाए थे।इस प्रकार डबरा में दो हफ्तों में दो दर्दनाक घटनाएं हुईं, जो भक्तों और स्थानीय प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।
