इस दौरे का सबसे अहम हिस्सा नर्मदा पेयजल परियोजना के चौथे चरण का भूमिपूजन है जिसे शहर के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेजी से बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए यह परियोजना इंदौर के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनेगी। वर्तमान में शहर की जलापूर्ति नर्मदा नदी पर आधारित है जहां से लगभग 70 किलोमीटर दूर से पानी पंप कर शहर तक पहुंचाया जाता है।
अब अमृत 2.0 योजना के तहत जल आपूर्ति को और अधिक सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इस योजना के तहत शहर की जल क्षमता को वर्तमान स्तर से बढ़ाकर आने वाले वर्षों की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। अनुमान है कि 2040 तक इंदौर की आबादी करीब 58 लाख से अधिक हो जाएगी जिसके लिए 1200 एमएलडी से ज्यादा पानी की आवश्यकता होगी। ऐसे में यह परियोजना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।
भूमिपूजन के तहत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य शुरू किए जाएंगे जिनमें लंबी पाइपलाइन बिछाना, आधुनिक टनल निर्माण और पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्लोरिनेशन सिस्टम की स्थापना शामिल है। इसके अलावा शहर में नए ओवरहेड टैंक बनाए जाएंगे और पुराने टैंकों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा जिससे पानी का वितरण अधिक प्रभावी और सुचारू हो सके।
इस परियोजना के जरिए लाखों घरों तक नए जल कनेक्शन दिए जाएंगे और स्मार्ट वाटर मीटर लगाए जाएंगे जिससे 24 घंटे दबावयुक्त जलापूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि शहर में शामिल नए गांवों तक भी पहली बार नियमित जलापूर्ति पहुंचाई जाएगी जिससे वहां के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री सिरपुर तालाब के संरक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना का लोकार्पण भी करेंगे। इस पहल के तहत सीवेज को सीधे तालाब में जाने से रोका जाएगा और आधुनिक तकनीक से उसका शोधन किया जाएगा। इससे न सिर्फ तालाब का पानी साफ होगा बल्कि उपचारित जल का उपयोग शहर के बगीचों और अन्य कार्यों में भी किया जा सकेगा।
संकल्प से समाधान अभियान के तहत भी इंदौर जिले में बड़ी सफलता मिली है जहां लाखों आवेदनों का निराकरण कर हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया गया है। इस अभियान के जरिए सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे।
कुल मिलाकर यह दौरा इंदौर के लिए विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है जिसमें बुनियादी सुविधाओं से लेकर जल प्रबंधन तक कई अहम क्षेत्रों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
