विरासत वन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पारंपरिक उद्यान की तरह नहीं बल्कि एक लिविंग क्लासरूम के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां लगाए गए पेड़-पौधे वन्यजीवों की आकृतियां और थीम आधारित वन क्षेत्र बच्चों को किताबों से बाहर निकलकर सीखने का अवसर देंगे। वन विभाग की इस पहल के तहत एक समय के बंजर भू-भाग को हरित स्वरूप में बदल दिया गया है जो अब पर्यावरण संरक्षण का मिसाल बन रहा है।विरासत वन में आधुनिक तकनीक का भी खास इस्तेमाल किया गया है। यहां पेड़ों और प्रमुख स्थलों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं। जैसे ही कोई बच्चा या पर्यटक क्यूआर कोड स्कैन करेगा उससे जुड़ी जानकारी सीधे मोबाइल स्क्रीन पर आ जाएगी। इसमें उस पेड़ या पौधे का नाम उसकी प्रजाति औषधीय गुण पर्यावरण में भूमिका और उससे जुड़े रोचक तथ्य डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे। इससे बच्चों में तकनीक के माध्यम से सीखने की रुचि भी बढ़ेगी।
इस वन को और आकर्षक बनाने के लिए जंगल के जानवरों की जीवंत मूर्तियां भी स्थापित की जा रही हैं। खास बात यह है कि इन मूर्तियों को अंतिम रूप देने के लिए बंगाल से आए अनुभवी कलाकार काम कर रहे हैं। कलाकारों द्वारा बनाई जा रही ये मूर्तियां इतनी वास्तविक होंगी कि देखने वालों को जंगल में होने का अहसास कराएंगी। अधिकारियों के अनुसार इस मूर्तिकला का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और जल्द ही यह वन पूरी तरह तैयार होकर लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।विरासत वन में 200 से अधिक प्रजातियों के 25 हजार से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं। यहां अलग-अलग विषयों पर आधारित वन विकसित किए गए हैं जिनमें नवग्रह वन नक्षत्र वन सप्तऋषि वन लक्ष्मी वन औषधीय वन और जैव विविधता वन शामिल हैं। हर वन का अपना अलग महत्व और उद्देश्य है जिससे भारतीय संस्कृति ज्योतिष आयुर्वेद और प्रकृति के गहरे संबंध को समझा जा सके।
वन विभाग का मानना है कि विरासत वन न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा बल्कि पर्यटन को भी नया आयाम देगा। खजुराहो आने वाले पर्यटक अब मंदिरों के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े इस विशेष केंद्र का भी अनुभव ले सकेंगे। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने में अहम भूमिका निभाएगी।
