ग्वालियर । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के बाद कांग्रेस पार्टी में घमासान मच गया है लेकिन उनके राजनीतिक गढ़ ग्वालियर-चंबल अंचल में अब तक इस मामले पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दिग्विजय सिंह ने हाल ही में संघ और भाजपा की प्रशंसा करते हुए सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट किया था जिस पर विवाद छिड़ गया है। इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस के कई नेताओं ने नाराजगी जताई है लेकिन ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में खामोशी का माहौल बना हुआ है।
कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि यह पोस्ट पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है जबकि पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थक खासकर उनके बेटे जयवर्धन सिंह और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह उनके समर्थन में खड़े हैं। जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के संगठन के प्रति समर्पण को व्यक्त करते हुए राहुल गांधी की यात्रा से जुड़े कुछ फोटो भी पोस्ट किए और कहा कि उनके पिता के लिए संगठन सर्वोपरि है।पूर्व मुख्यमंत्री के संगठन के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाने वालों को डॉ. गोविंद सिंह ने गलत बताया।
उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के संगठन के प्रति समर्पण पर संदेह करना अनुचित है और उनके द्वारा की गई पोस्ट केवल एक व्यंग्य है न कि भाजपा या संघ की प्रशंसा।दिग्विजय सिंह की पोस्ट के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में उनके कट्टर समर्थक माने जाने वाले नेताओं जैसे पूर्व मंत्री केपी सिंह और राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके साथ ही उनके विरोधी भी फिलहाल चुप हैं जिससे यह साफ है कि कांग्रेस के नेता शायद पार्टी नेतृत्व के रूख का इंतजार कर रहे हैं।
वहीं भाजपा के नेताओं ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ हमलावर रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का न्योता दिया जबकि नगरीय निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें सरदार पटेल के रूप में निरूपित किया। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे दिग्विजय सिंह की राज्यसभा में दोबारा जाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश बताया। अब देखना होगा कि दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट का असर कांग्रेस पार्टी और उनके गढ़ ग्वालियर-चंबल में किस प्रकार होता है और क्या इस विवाद से पार्टी में कोई बड़े बदलाव होते हैं।