दो दिवसीय इस सम्मेलन का उद्घाटन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इस अवसर पर नरेन्द्र सिंह तोमर और रमन सिंह जैसे वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहेंगे जो युवा विधायकों का मार्गदर्शन करेंगे। वहीं समापन सत्र में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की मौजूदगी इस सम्मेलन को और अधिक महत्वपूर्ण बनाएगी।
इस सम्मेलन में तीनों राज्यों से युवा विधायकों की भागीदारी भी संतुलित और व्यापक है। मध्यप्रदेश से 18, छत्तीसगढ़ से 15 और राजस्थान से 22 विधायक इसमें शामिल होंगे। यह आयोजन न केवल संख्या के लिहाज से बड़ा है बल्कि इसके उद्देश्यों की दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि पहली बार इस तरह तीन राज्यों के युवा जनप्रतिनिधियों को एक साझा मंच दिया जा रहा है जहां वे अपने अनुभवों और विचारों का आदान-प्रदान कर सकेंगे।
सम्मेलन के दौरान दो प्रमुख विषयों पर गहन चर्चा और मंथन किया जाएगा जिनमें लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका और विकसित भारत 2047 का विजन शामिल है। इन सत्रों में युवा विधायक अपने अपने क्षेत्रों में किए गए नवाचार, सफल योजनाओं और जमीनी अनुभवों को साझा करेंगे। इसके साथ ही वे उन चुनौतियों पर भी चर्चा करेंगे जो भविष्य में शासन और नीति निर्माण के दौरान सामने आ सकती हैं। इस तरह यह मंच केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि व्यावहारिक समाधान खोजने का भी प्रयास करेगा।
विधानसभा सचिवालय के अनुसार यह सम्मेलन विधान परिषद भवन में आयोजित किया जाएगा जहां विभिन्न सत्रों के माध्यम से युवा नेतृत्व को सशक्त बनाने पर जोर दिया जाएगा। यह आयोजन संसदीय प्रणाली को समझने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि देश के भविष्य की राजनीति को आकार देने की दिशा में एक सार्थक पहल है। यहां लिए गए विचार और सुझाव आने वाले वर्षों में नीति निर्माण और विकास के एजेंडे को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि युवा विधायक इस मंच से किस तरह के विचार और विजन देश के सामने रखते हैं और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अपनी भूमिका को कैसे परिभाषित करते हैं।
