कर्नल ने थाने में मौजूद पुलिस कर्मियों से विवाद के विवरण के साथ कुछ जवानों के बयान भी दर्ज किए। इसके बाद कर्नल ने सीधे टीआई विजय केन के आवास का दौरा किया। वहां उन्होंने पाया कि टीआई नशे की हालत में थे और ठीक से संवाद करने की स्थिति में नहीं थे। कर्नल ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता बताया और कहा कि ड्यूटी के दौरान शराब पीना किसी भी अधिकारी के लिए स्वीकार्य नहीं है।
इस गंभीर मामले को लेकर कर्नल ने भिंड के एसपी असित यादव से करीब 35 मिनट तक मुलाकात की और सख्त कार्रवाई की मांग की। कर्नल ने स्पष्ट कहा कि आर्मी के पूर्व जवान के साथ दुर्व्यवहार और ड्यूटी के दौरान शराब पीने जैसी घटनाओं को गंभीरता से लेना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस मामले की रिपोर्ट आर्मी के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाएगी और पुलिस की कार्रवाई पर निगरानी रखी जाएगी।
एसपी असित यादव ने बताया कि टीआई विजय केन को फिलहाल लाइन अटैच कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पहले भी टीआई के शराब पीने की शिकायतें आ चुकी हैं और पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मिहोना थाना में इस विवाद ने स्थानीय प्रशासन और आर्मी अधिकारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। कर्नल विशाल ने कहा कि आर्मी के किसी भी पूर्व जवान के साथ दुर्व्यवहार को नज़रअंदाज नहीं किया जाएगा और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। कर्नल की मांग है कि पुलिस विभाग भी ऐसे मामलों में अनुशासनहीन अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करे।
किसी भी संगठन में अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। यह मामला यह साबित करता है कि चाहे कोई अधिकारी कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो, उसके कार्यों की निगरानी की जाती है और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय प्रशासन और आर्मी दोनों मिलकर इस मामले की निष्पक्ष जांच कर रहे हैं।
इस विवाद ने यह भी उजागर किया है कि शराब और ड्यूटी का मेल किसी भी विभाग में गंभीर परिणाम ला सकता है। मिहोना थाना और भिंड जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल, टीआई को लाइन अटैच किया गया है, रिटायर्ड सूबेदार मेजर राकेश सिंह कुशवाहा अपनी बात प्रशासन के सामने रख चुके हैं, और पूरे मामले की निगरानी आर्मी द्वारा की जा रही है।
स्थानीय लोग और आर्मी अधिकारी इस मामले की निष्पक्षता और उचित कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। यह घटना पुलिस विभाग के लिए भी एक चेतावनी है कि अनुशासनहीनता के मामलों में कोई छूट नहीं होगी और हर अधिकारी अपने कर्तव्य के प्रति जिम्मेदार रहेगा।
