कालीदास महाराज का रुख:
संत समिति के अध्यक्ष कालीदास महाराज अपने रुख पर अड़े हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने बरैठा टोल प्लाजा पर धर्मध्वजा स्थापित कर दी है और धर्मध्वजा के सम्मान में आंदोलन अवश्य होगा। 16 मार्च को सभी लोग आंदोलन स्थल पर अपनी बात रख सकते हैं। मंत्री और एनएचएआई अधिकारी भी वहां चर्चा कर सकते हैं।
कालीदास महाराज ने आरोप लगाया कि पिछले एक साल में हाईवे पर 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवारों के घर तक शोक व्यक्त करने नहीं पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाईवे चौड़ीकरण तक टोल वसूली नहीं होने दी जाएगी।
मंत्री राकेश शुक्ला की कोशिश:
मंत्री राकेश शुक्ला ने दंदरौआ धाम के महंत महामंडलेश्वर रामदास महाराज से मुलाकात कर आंदोलन स्थगित करने की अपील की। मंत्री के प्रयास से संत समाज में दो धड़े बन गए हैं, हालांकि कालीदास महाराज आंदोलन रोकने के लिए किसी दबाव में नहीं हैं।
सड़क चौड़ीकरण और समय सीमा:
जिला पंचायत कार्यालय में मंत्री, एनएचएआई अधिकारियों और समाजसेवियों की बैठक में बताया गया कि हाईवे को फोरलेन बनाने से पहले डीपीआर तैयार होगी। इसके बाद भूमि अधिग्रहण और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा काम करीब एक वर्ष लेगा और संभवतः फरवरी 2027 के बाद ही सड़क विकास कार्य शुरू होगा।
समाजसेवियों की तीन प्रमुख मांगें:
टोल वसूली बंद करना।
सड़क हादसों पर रोक की गारंटी।
हाईवे चौड़ीकरण जल्द शुरू करना।
रामदास महाराज का बयान:
बैठक में कालीदास महाराज की गैरमौजूदगी पर सवाल उठने पर दंदरौआ धाम के महंत रामदास महाराज ने कहा कि संत समिति के प्रदेश अध्यक्ष कालीदास महाराज ही हैं। उनका कहना है कि जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह उन्हें मान्य होगा।
