ग्वालियर। शहर में साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जनकगंज स्थित खासगी बाजार में रहने वाले एक बीजेपी नेता के नाबालिग बेटे के बैंक खाते से साइबर ठगों ने 50 हजार रुपए निकाल लिए। इस घटना में हैरानी की बात यह है कि धोखाधड़ी के दौरान न तो पीड़ित को कोई कॉल आया, न कोई मैसेज (OTP) मिला और न ही उसका मोबाइल फोन बंद हुआ। यह घटना 25 नवंबर की बताई जा रही है।
शाम को बैलेंस चेक करने पर चला पता
बीजेपी नेता सुधीर गुप्ता के नाबालिग बेटे का एक निजी बैंक में खाता है। मंगलवार (25 नवंबर) की शाम करीब 6:30 बजे, जब बेटे ने अपना बैंक बैलेंस चेक किया, तब उसे पता चला कि उसके खाते से बड़ी रकम 50 हजार रुपए निकाल ली गई है।
साइबर सेल में मामला दर्ज
ठगी का पता चलते ही बीजेपी नेता सुधीर गुप्ता अपने बेटे के साथ साइबर सेल थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई।शिकायत के बाद साइबर सेल पुलिस ने अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और पड़ताल शुरू कर दी है।
जांच का विषय: पुलिस का कहना है कि वे इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि बिना किसी ओटीपी या कॉल के इतनी बड़ी रकम खाते से कैसे निकाली गई। यह मामला संभवतः सिम स्वैपिंग (SIM Swapping) या किसी अन्य जटिल हाईटेक फ्रॉड से जुड़ा हो सकता है।पुलिस ने अज्ञात आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
यह घटना ग्वालियर के निवासियों के लिए एक चेतावनी है कि साइबर अपराधी अब बिना किसी प्रत्यक्ष संपर्क के भी खातों से पैसे उड़ाने में सक्षम हो रहे हैं।
बिना OTP फ्रॉड होने पर अपनाए जाने वाले 5 जरूरी कदम
1. तुरंत बैंक को सूचित करें (Immediate Notification)
पहला कदम: जैसे ही आपको खाते से अवैध लेन-देन का पता चले, सबसे पहले अपने बैंक के 24×7 फ्रॉड हेल्पलाइन नंबर या ईमेल पर तुरंत संपर्क करें।
कार्ड ब्लॉक कराएं: धोखाधड़ी की सूचना देते ही तुरंत अपना डेबिट/क्रेडिट कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग एक्सेस ब्लॉक करवा दें ताकि आगे कोई नुकसान न हो।
2. लेन-देन (Transaction) का पूरा विवरण दें
समय और राशि: बैंक को यह स्पष्ट बताएं कि लेन-देन किस समय, किस तारीख को और कितनी राशि का हुआ।
नो-ओटीपी स्थिति: विशेष रूप से इस बात पर जोर दें कि यह लेन-देन बिना किसी ओटीपी (OTP) या पिन (PIN) दर्ज किए हुआ है। यह स्थिति बैंक को जांच की दिशा बदलने में मदद करती है (जैसे कि सिम स्वैपिंग या मैलवेयर की जाँच)।
3. 48-72 घंटे का नियम और पुलिस शिकायत (Liability & FIR)
ग्राहक की देनदारी: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि फ्रॉड आपके खाते से बिना आपकी गलती या लापरवाही के हुआ है (जैसे कि बिना OTP के), और आप 72 घंटे के भीतर बैंक को सूचित करते हैं, तो आपकी देनदारी (Liability) ज़ीरो हो सकती है।
FIR दर्ज कराएं: तत्काल नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराएं और उसकी कॉपी बैंक को दें। बैंक अक्सर FIR की कॉपी मांगते हैं ताकि वे जांच शुरू कर सकें।
4. अपने मोबाइल ऑपरेटर से संपर्क करें (Check SIM Swapping)
चूंकि यह बिना OTP का फ्रॉड है, इसलिए यह सिम स्वैपिंग का मामला हो सकता है।
अपने मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर (Airtel, Jio, Vi आदि) को कॉल करके पता करें कि कहीं आपकी जानकारी के बिना आपका सिम कार्ड ब्लॉक तो नहीं किया गया था या किसी नए सिम कार्ड पर नंबर पोर्ट तो नहीं किया गया था।
5. लिखित शिकायत और पावती लें (Written Complaint)
सिर्फ फोन कॉल पर भरोसा न करें। बैंक को एक लिखित शिकायत (ईमेल या शाखा में) भेजें।
बैंक से अपनी शिकायत दर्ज होने की पावती (Acknowledgement) या शिकायत संख्या (Complaint Reference Number) लेना सुनिश्चित करें। यह भविष्य में कानूनी या बैंकिंग लोकपाल से संपर्क करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रमाण होता है।
ये कदम तत्काल नुकसान को रोकने और आपकी राशि वापस पाने की प्रक्रिया शुरू करने में निर्णायक होते हैं।
