जानकारी के अनुसार, घायल ससुर-दामाद को फौरन नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर हालत के चलते उन्हें ग्वालियर रेफर किया गया। दोनों की हालत नाजुक बनी हुई है।
घटना से जुड़े लोगों के मुताबिक, यह हमला एक दिन पहले हुई मारपीट और धमकी की घटनाओं का नतीजा था। बुधवार को गीताराम, गिर्राज, छोटू गुर्जर और उनके साथियों ने देवेंद्र गुर्जर और बबलू गुर्जर को नेशनल हाईवे-44 के जारह गांव चौराहे के पास घेरकर पीटा और धमकी दी थी कि अगर थाने में शिकायत की तो गोली मार दी जाएगी। पीड़ितों ने तुरंत सराय छोला थाना जाकर FIR दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
पुलिस की लापरवाही का फायदा उठाते हुए गुरुवार शाम करीब 5 बजे वही आरोपियों ने ससुर-दामाद को घेर लिया और फायरिंग शुरू कर दी। इस वारदात ने इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया।
घायलों के परिजनों के अनुसार, देवेंद्र की जांघ और औतार गुर्जर के पैर में गोली लगी थी। दोनों खून से सने हुए थे और उनकी हालत गंभीर थी। उन्हें इलाज के लिए तत्काल ग्वालियर रेफर किया गया। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि पहले की मारपीट और धमकी की घटनाओं के बावजूद आरोपियों की तलाश नहीं की गई थी, जिससे वारदात को अंजाम देने का मौका मिला।
मामले में सीएसपी दीपाली चन्दौरिया ने बताया कि घायलों के बयान दर्ज करने के लिए पुलिस टीम ग्वालियर भेजी गई है और मौके से कुछ कारतूस भी बरामद किए गए हैं। पुलिस ने कहा कि आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही उन्हें पकड़ने के प्रयास किए जाएंगे।
यह घटना मुरैना जिले में कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल उठाती है। पहले हुई धमकी और मारपीट के बावजूद सुरक्षा उपाय न किए जाने से ससुर-दामाद की जान खतरे में पड़ गई। स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह के घातक हमलों से बचा जा सके।
