मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी प्रदेश की माटी के सच्चे सपूत थे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने अपनी कलम को राष्ट्रसेवा का माध्यम बनाया और जनमानस को जागृत करने का कार्य किया। उनकी रचनाएं आज भी युवाओं को देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने साहित्य और पत्रकारिता के माध्यम से समाज को नई दिशा दी और राष्ट्रीय चेतना को सशक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धेय चतुर्वेदी का जीवन त्याग, तपस्या और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई, बल्कि अपने विचारों और लेखन से देश के करोड़ों लोगों के मन में स्वाधीनता की लौ जलाए रखी। उनकी कविताएं और लेख आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने अपने समय में थे। उनके शब्दों में समाज को जोड़ने और राष्ट्र निर्माण की शक्ति थी।
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी ने पत्रकारिता को मिशन के रूप में अपनाया। उन्होंने सत्य, साहस और जनहित को पत्रकारिता की आधारशिला बनाया। उनके संपादन और लेखन ने पत्रकारिता को केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त औजार बनाया। उन्होंने जिस निर्भीकता के साथ अपने विचार रखे, वह आज के समय में भी पत्रकारों और लेखकों के लिए प्रेरणास्रोत है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की कृतियां राष्ट्रसेवा, समाज के नवनिर्माण और लोक कल्याण के मार्ग को प्रशस्त करती हैं। उनका साहित्य हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है और राष्ट्रीय एकता व अखंडता को मजबूत करता है। ऐसे महान व्यक्तित्वों का स्मरण करना और उनके विचारों को आत्मसात करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और राष्ट्र व समाज के हित में कार्य करें। उन्होंने कहा कि श्रद्धेय चतुर्वेदी अपने प्रखर विचारों, ओजस्वी लेखनी और राष्ट्रभक्ति के कारण सदैव स्मरणीय रहेंगे।
