कांग्रेस के अनुसार यह ट्रेड डील किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों के खिलाफ है। पार्टी का आरोप है कि यदि यह समझौता मौजूदा स्वरूप में लागू होता है तो देश के कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ेगा और स्थानीय बाजारों में विदेशी दबाव बढ़ेगा। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने इसे जनआंदोलन का रूप देने की तैयारी की है।
कार्यक्रम के तहत दोपहर एक बजे दोनों वरिष्ठ नेता भोपाल पहुंचेंगे और लगभग दो बजे सभा स्थल पर उपस्थित होकर किसानों को संबोधित करेंगे। सम्मेलन में प्रदेशभर से आए किसानों की भागीदारी होगी। कांग्रेस ने दावा किया है कि इस आंदोलन में करीब एक लाख किसान शामिल होंगे। विशेष रूप से भोपाल के आसपास के 11 जिलों से बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने की संभावना जताई गई है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि किसानों की आवाज को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का प्रयास है। चौपाल के माध्यम से किसान अपनी समस्याएं, आशंकाएं और सुझाव खुलकर रख सकेंगे। पार्टी इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाने की रणनीति पर काम कर रही है।
इसी कड़ी में कांग्रेस व्यापारिक संगठनों से भी संवाद करेगी। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी भोपाल के श्यामला हिल्स और लखेरापुरा क्षेत्रों में व्यापारियों से मुलाकात करेंगे। अमेरिका ट्रेड डील के संभावित प्रभावों पर चर्चा की जाएगी और व्यापारियों की राय जानी जाएगी। दोपहर साढ़े तीन बजे कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता बाजार क्षेत्रों में पहुंचकर आम व्यापारियों से संवाद करेंगे।
भोपाल में प्रस्तावित यह मेगा प्रदर्शन प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है। कांग्रेस इसे किसान हितों की रक्षा का आंदोलन बता रही है, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी समीकरणों के लिहाज से भी यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अटल पथ पर होने वाली यह किसानों की चौपाल केवल एक सभा नहीं बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा शक्ति प्रदर्शन मानी जा रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इस आंदोलन का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव कितना व्यापक होता है।
