नई दिल्ली । आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के विवादित बयान ने राजनीति और समाज में हलचल मचा दी है। मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ अजाक्स के पहले अधिवेशन में प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने के बाद वर्मा ने मंच से एक बयान दिया था जिसने विवाद पैदा कर दिया। उन्होंने कहा था जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान न करे और उससे संबंध न बना ले तब तक आरक्षण लागू रहना चाहिए। इस बयान ने न केवल ब्राह्मण समाज को आहत किया बल्कि पूरे देश में इस पर चर्चा शुरू हो गई।
विवाद का बढ़ना
संतोष वर्मा का यह बयान 23 नवंबर को भोपाल में अजाक्स के मंच से आया था और इसके बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। उनके इस बयान के कारण ब्राह्मण समाज में आक्रोश फैल गया और मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन होने लगे। इसके परिणामस्वरूप मध्य प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग ने संतोष वर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया और उनसे 7 दिनों के भीतर लिखित जवाब देने को कहा। विभाग ने यह चेतावनी भी दी कि अगर संतोष वर्मा का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
उदित राज का समर्थन
कांग्रेस के वरिष्ठ दलित नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने संतोष वर्मा का समर्थन किया और उनके बयान को रोटी-बेटी के रिश्ते तक सीमित बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य बीजेपी नेता यह कहते रहते हैं कि सब हिंदू हैं तो संतोष वर्मा का बयान गलत क्यों माना जा रहा है। उदित राज ने यह भी पूछा कि जब संतोष वर्मा ने वही बात कही तो मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें नोटिस क्यों जारी किया।
उदित राज ने ब्राह्मण समाज के विरोध पर भी सवाल उठाया और कहा कि हिंदू राष्ट्र की मांग करने वालों को इस मामले में संतोष वर्मा के साथ खड़ा होना चाहिए। उनका तर्क था कि यदि ब्राह्मण समाज इस बयान के खिलाफ खड़ा होता है तो भविष्य में ऐसे बयान देने का अधिकार भी सवालों के घेरे में आ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सभी हिंदू एक हैं तो इस मुद्दे पर एकता दिखानी चाहिए और संतोष वर्मा का साथ देना चाहिए।
ब्राह्मण समाज का विरोध
संतोष वर्मा के बयान के बाद ब्राह्मण समाज में गुस्सा फैल गया। उनके बयान को जातिवादी और भड़काऊ माना गया और इसके विरोध में कई स्थानों पर प्रदर्शन हुए। विरोधियों का कहना था कि यह बयान जातिवाद को बढ़ावा देने वाला है और समाज को बांटने का प्रयास है। इसके अलावा कुछ लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या उच्च जातियों के खिलाफ ऐसी टिप्पणी करना सही है और क्या यह एक सरकारी अधिकारी के पद पर रहते हुए उचित है।
मध्य प्रदेश सरकार का कदम
मध्य प्रदेश सरकार ने संतोष वर्मा को नोटिस जारी करते हुए उनकी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण मांगा। सरकार का कहना था कि यह बयान सरकारी सेवा के एक अधिकारी द्वारा समाज के एक बड़े वर्ग को आहत करने वाला था और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संतोष वर्मा का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
संतोष वर्मा का बयान भारतीय समाज के जातिवाद और आरक्षण से जुड़े जटिल मुद्दों पर एक बार फिर बहस को जन्म दे गया है। जहां एक ओर ब्राह्मण समाज ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है वहीं कांग्रेस नेता उदित राज ने उनका समर्थन करते हुए इस मुद्दे को व्यापक राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से देखा है। यह मामला अब केवल एक विवादित बयान तक सीमित नहीं रह गया बल्कि यह आरक्षण, जातिवाद और भारतीय समाज की मौजूदा सामाजिक संरचना पर गहरे सवाल उठा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि मध्य प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर किस दिशा में आगे बढ़ती है और संतोष वर्मा को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
