डॉ. सिंह ने सदन में कहा कि वर्तमान आयुष्मान योजना का दायरा सीमित है और इसकी 5 लाख की सीमा गंभीर बीमारियों के लिए पर्याप्त नहीं। उन्होंने कहा कि जैसे आईएएस-आईपीएस अधिकारियों को जीवनभर मुफ्त इलाज मिलता है, वैसे ही आम जनता को भी समान स्वास्थ्य सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा, “सबसे बड़ा सुख निरोगी काया है।” डॉ. सिंह ने सरकार से आग्रह किया कि अगर जरूरत पड़े तो कर्ज लेकर भी यह सुविधा लागू की जाए और जनता को इसका लाभ मिले।
सदन में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने लाड़ली बहन योजना के उदाहरण के जरिए बात रखी, लेकिन डॉ. सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि 1500 रुपए की राशि बड़े ऑपरेशन के खर्च के सामने नगण्य है। उन्होंने स्वास्थ्य को राजनीति और वोट बैंक से ऊपर उठाकर एक अनिवार्य अधिकार बनाने की बात कही। इस पहल से मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य क्रांति की दिशा में संभावित कदम की शुरुआत हो सकती है।
