घटना तब उजागर हुई जब बीते एक सप्ताह से इलाके में उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायतें लगातार बढ़ने लगीं। सोमवार रात स्थिति गंभीर हो गई और बड़ी संख्या में लोग निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए। मंगलवार को दिनभर मौतों की सूचनाएं मिलती रहीं, और देर रात तक कुल 8 मौतों की जानकारी सामने आई। प्रशासन ने बताया कि मौतों का कारण डायरिया और जलजनित संक्रमण है।स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के अनुसार अब तक क्षेत्र के 2700 से अधिक घरों का सर्वे किया जा चुका है और लगभग 12,000 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई है। मौके पर 1,100 से अधिक लोगों को प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि गंभीर स्थिति वाले मरीजों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया। कई अस्पतालों में विशेष वार्ड और अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है जबकि कुछ मरीजों को आईसीयू में रखा गया।
जांच के दौरान भागीरथपुरा इलाके में एक चौंकाने वाली वजह सामने आई। चौकी से सटे शौचालय के नीचे से गुजर रही मुख्य जल आपूर्ति लाइन में लीकेज पाया गया, जिससे गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया। माना जा रहा है कि इसी कारण संक्रमण बड़े पैमाने पर फैला। मरम्मत के लिए संबंधित संरचना को तोड़कर लाइन की तत्काल मरम्मत कराई गई। इसके अलावा नर्मदा जल आपूर्ति लाइन से भी बदबूदार पानी आने की शिकायतें मिली हैं।प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इलाके में डॉक्टरों की टीमें, पैरामेडिकल स्टाफ और आशा कार्यकर्ताओं को तैनात किया है। लोगों को उबला हुआ पानी पीने, बाहर का भोजन न करने और लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह दी जा रही है। राहत के तौर पर टैंकरों से साफ पानी की आपूर्ति की जा रही है और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।
इस गंभीर मामले के बाद नगर निगम और जल आपूर्ति से जुड़े अधिकारियों पर निलंबन और सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई की गई है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने और सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने की घोषणा की है।यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है बल्कि स्वच्छता के राष्ट्रीय मॉडल माने जाने वाले शहर की बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल खड़े करती है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी होंगी।
