याचिका में नियुक्ति प्रक्रिया पर प्रश्न उठाए गए
याचिका एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष सचिन रजक द्वारा दायर की गई है याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उत्कर्ष अग्रवाल ने तर्क दिया कि कुलगुरु की नियुक्ति निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं हुई याचिका में कहा गया कि पीएचडी उपाधि के बाद न्यूनतम दस वर्ष का शैक्षणिक अनुभव अनिवार्य होता है जबकि इस मानदंड का पालन नहीं किया गया
यूजीसी मानकों और चयन प्रक्रिया पर बहस
सुनवाई के दौरान यह भी मुद्दा उठा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं और चयन प्रक्रिया के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है याचिका में तर्क दिया गया कि यदि प्राध्यापक पद पर मूल नियुक्ति ही नियमों के विरुद्ध रही हो तो कुलगुरु पद पर की गई नियुक्ति की वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है
राज्य सरकार ने मांगा अतिरिक्त समय
राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता वेद प्रकाश तिवारी ने न्यायालय में पक्ष रखा और जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया न्यायालय ने आदेश में कहा कि प्रतिवादियों को 7 अप्रैल 2025 को नोटिस तामील किया जा चुका है लेकिन अब तक कोई जवाब प्रस्तुत नहीं हुआ इसे देखते हुए चार सप्ताह का अंतिम अवसर दिया गया
सार्वजनिक हित और विशेषज्ञों की राय
मामला उच्च शिक्षा प्रशासन और नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा होने के कारण इसे सार्वजनिक हित से महत्वपूर्ण माना जा रहा है विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय का अंतिम निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासनिक नियुक्तियों के मानकों और जवाबदेही के दायरे को स्पष्ट कर सकता है
आगामी सुनवाई पर सभी की नजरें
फिलहाल सभी पक्षों की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है जहां राज्य सरकार का जवाब और न्यायालय की टिप्पणी मामले की दिशा तय कर सकती है यह विवाद न केवल आरडीवीवी बल्कि राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक नियुक्तियों के लिए भी उदाहरण बन सकता है
