“सिर्फ 10 मिनट रुके थे… और सब खत्म हो गया”
हादसे की चश्मदीद श्रीबंती ने बताया कि वे लोग सिर्फ 10 मिनट के लिए सड़क किनारे रुके थे, लेकिन इसी दौरान मौत बनकर आए टैंकर ने सब कुछ खत्म कर दिया। उन्होंने कहा, “ऐसा मंजर था कि हर तरफ चीख-पुकार और खून ही खून था। शवों की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें कपड़े में समेटना पड़ा।” हादसे में मृत सभी लोग आपस में रिश्तेदार थे, जिनमें पिता-पुत्र भी शामिल हैं। रविवार दोपहर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पंक्चर गाड़ी बनी हादसे की वजह
जानकारी के मुताबिक, परसवाह गांव के लोग सिलयारी गांव में एक कार्यक्रम से लौट रहे थे। तभी किकरा तालाब गांव के पास उनकी पिकअप गाड़ी का टायर पंक्चर हो गया। ड्राइवर टायर बदल रहा था और बाकी लोग सड़क किनारे खड़े होकर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान अमरकंटक की ओर से आ रहा तेज रफ्तार टैंकर अनियंत्रित होकर लोगों को रौंदता हुआ निकल गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कुछ लोग करीब 10 फीट दूर जा गिरे।
घायल बोला-“अगर टॉयलेट नहीं जाता, तो मैं भी नहीं बचता”
हादसे में घायल 20 वर्षीय उदय प्रताप, जो जिला अस्पताल में भर्ती है, ने बताया कि वह टायर बदलने में मदद कर रहा था, लेकिन अचानक टॉयलेट जाने के लिए साइड में चला गया। तभी तेज आवाज हुई और वह दूर जाकर गिर पड़ा। “अगर मैं वहां खड़ा रहता, तो शायद आज जिंदा नहीं होता,” उसने कहा। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
मंजर ऐसा कि सड़क पर बिखरे थे शरीर के टुकड़े
घटनास्थल पर खून और मांस के लोथड़े बिखरे पड़े थे। जूते-चप्पल और अन्य सामान सड़क पर फैले हुए थे। बस स्टॉप और बिजली का खंभा भी टक्कर से क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस के मुताबिक, शवों की स्थिति बेहद खराब थी—किसी का सिर कुचला था, किसी के पैर टूटे थे तो किसी का पेट फटा हुआ था।
ड्राइवर गिरफ्तार, झपकी को बताया वजह
पुलिस ने टैंकर चालक रमेश पटेल (निवासी मैहर) को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसे गाड़ी चलाते समय झपकी आ गई थी, जिसके चलते यह हादसा हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
3 घंटे तक जाम, भारी मशक्कत के बाद खुला रास्ता
हादसे के बाद हाईवे पर करीब 3 घंटे तक यातायात बाधित रहा। पुलिस और प्रशासन की टीम ने जेसीबी और क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाया और सड़क को साफ कराया। इसके बाद ही यातायात बहाल हो सका।
