स्कंद पुराण में उल्लेख मिलता है कि वैशाख माह में किया गया दान अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक फल प्रदान करता है। इस दौरान किए गए छोटे-छोटे पुण्य कार्य भी अक्षय फल देने वाले माने जाते हैं। मान्यता है कि इस महीने में भगवान विष्णु की कृपा विशेष रूप से प्राप्त होती है और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है वैशाख महीने में जल दान को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। गर्मी के इस मौसम में प्यासे लोगों को जल उपलब्ध कराना न केवल मानवता का कार्य है बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत पुण्यदायी है।
फलों का दान भी इस महीने में अत्यंत शुभ माना गया है। तरबूज, खरबूजा और बेल जैसे मौसमी फलों का दान करने से घर में सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से लाभकारी है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है। सत्तू का दान और सेवन भी वैशाख माह में विशेष महत्व रखता है। सत्तू शरीर को ठंडक देता है और गर्मी से बचाव करता है। इसलिए इस महीने में जरूरतमंदों को सत्तू का दान करना पुण्यकारी माना गया है।
इसके साथ ही पादुका यानी जूते-चप्पल और चटाई का दान भी अत्यंत फलदायी बताया गया है। गर्मी के मौसम में यह वस्तुएं जरूरतमंदों के लिए राहत प्रदान करती हैं। शास्त्रों के अनुसार इनका दान करने से व्यक्ति के कष्ट दूर होते हैं और उसे उत्तम फल की प्राप्ति होती है। कुल मिलाकर वैशाख माह सेवा, दया और दान का महीना है। इस दौरान किए गए छोटे-छोटे दान भी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति का जीवन सुखमय बन सकता है।
