सबसे ज्यादा नाम इंदौर के शिक्षक
STF की ताजा कार्रवाई में यह सामने आया कि जिन 26 नए नामों को FIR में जोड़ा गया है उनमें इंदौर जिले के 20 शिक्षक शामिल हैं।इसके अलावा ग्वालियर मुरैना और शिवपुरी जिलों के शिक्षक भी इस फर्जीवाड़े में पकड़े गए हैं।
यह तथ्य सामने आया है कि इन सभी ने फर्जी अंकसूची तैयार करवाकर सरकारी शिक्षक पद पर नियुक्ति हासिल कर ली थी। जब विभागों ने सत्यापन के लिए दस्तावेज़ भेजे तब भी खेल जारी रहा – यानी सत्यापन रिपोर्ट तक फर्जी तरीके से तैयार कराई गई।
कैसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा?
STF पिछले कुछ महीनों से इस मामले की गहन जांच कर रही थी। जांच में पाया गया कि कई शिक्षकों की अंकसूची में दाखिल नंबर संस्थान के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते प्रशिक्षण संस्थानों से मिली जानकारी में कई नाम दर्ज ही नहीं थे
जिन वर्ष में परीक्षाएं हुईं ही नहीं उनमें भी कुछ शिक्षकों की मार्कशीट जारी दिखाई गई सत्यापन के दौरान अलग-अलग जिलों में जाली सील और फर्जी दस्तावेज लगाए गए इन तमाम पहलुओं की पुष्टि के बाद STF ने 26 और शिक्षकों को FIR में शामिल कर लिया है।
STF ने की पुष्टि
ताजा कार्रवाई की पुष्टि STF अधिकारियों ने की है। उनका कहना है कि यह फर्जीवाड़ा केवल जाली अंकसूची बनाने तक सीमित नहीं था बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है जो-फर्जी मार्कशीट तैयार करवाता सत्यापन के दौरान अफसरों का नाम मुहर और हस्ताक्षर तक जालसाजी से बनवा देता और गलत दस्तावेजों की मदद से उम्मीदवारों की नियुक्ति करा देता अधिकारियों ने यह भी बताया कि जांच अभी जारी है और संभव है कि आगे और नाम सामने आएं।
34 शिक्षक सरकारी नौकरी कैसे पा गए?
जांच में यह बात भी सामने आई कि भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेज़ों की जांच को गंभीरता से नहीं किया गया। कुछ विभागों ने सत्यापन रिपोर्ट आने तक शिक्षकों को अस्थायी नियुक्ति दे दी। इसी दौरान फर्जी सत्यापन रिपोर्ट लगाकर कई लोग स्थायी नियुक्त भी हो गए। अब जब दुबारा विभागीय छानबीन शुरू हुई तब मामला पकड़ में आया।
क्या होगी आगे की कार्रवाई?
STF द्वारा दर्ज की गई FIR में अब 34 शिक्षक शामिल हैं। इन पर IPC की विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए जा रहे हैं जिनमें शामिल हैं- धोखाधड़ी ,जालसाजी, फर्जी दस्तावेज बनाना, सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए षड्यंत्रअधिकारियों ने बताया कि अगला कदम इन सभी शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त करने का होगा।साथ ही उस नेटवर्क की भी तलाश की जा रही है जिसने फर्जी अंकसूची और सत्यापन तैयार कर इन्हें नौकरी दिलवाई।
प्रदेश में बड़ा शिक्षा घोटाला?
लगातार बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों का नहीं बल्कि बड़े स्तर का संगठित फर्जीवाड़ा है। शिक्षा विभाग में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ने के बाद अब शासन भी इसे गंभीरता से ले रहा है।जांच एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि- हर जिले में डीएड मार्कशीट का पुन: सत्यापन किया जाए 2010 से 2020 तक की सभी नियुक्तियों का मिलान कराया जाए किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए
यह कदम संभावित बड़े घोटाले का खुलासा भी कर सकता है।
STF की इस कार्रवाई ने मध्यप्रदेश के शिक्षा तंत्र में एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर संकेत किया है। डीएड की फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने वाले 34 शिक्षकों का सामने आना बताता है कि फर्जीवाड़ा कितना गहरा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जिन जिलों में बड़ी संख्या में फर्जी शिक्षक मिले हैं वहां शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों का भविष्य किसके भरोसे है?
