डोर-टू-डोर सत्यापन और दावे-आपत्तियों के बाद किया गया संशोधन
प्रशासन के मुताबिक यह कार्रवाई डोर-टू-डोर सर्वे, दावे-आपत्तियों की सुनवाई और दस्तावेज सत्यापन के बाद की गई पूरी प्रक्रिया लगभग चार महीने तक चली प्रारूप सूची 23 दिसंबर को प्रकाशित की गई थी जिसके बाद बूथ स्तर पर फॉर्म 6, 7 और 8 के माध्यम से आवेदन लिए गए
गोविंदपुरा और नरेला में सबसे अधिक नाम हटाए गए
सबसे अधिक संशोधन गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में हुआ जहां मंत्री कृष्णा गौर के क्षेत्र से 81 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटे इसके बाद मंत्री विश्वास सारंग की नरेला विधानसभा में 70 हजार से अधिक नाम सूची से बाहर हुए प्रशासन का कहना है कि ये बदलाव सत्यापन और रिकॉर्ड अपडेट की प्रक्रिया का हिस्सा हैं
कलेक्टर की अध्यक्षता में अंतिम सूची की मंजूरी
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में अंतिम सूची को मंजूरी देने के लिए स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित की जाएगी अधिकारियों ने बताया कि ‘नो मैपिंग’ श्रेणी में रखे गए मतदाताओं को नोटिस जारी कर 50 दिनों के भीतर दस्तावेज जांच की गई और 14 फरवरी तक सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी
उम्र आधारित और अन्य आंकड़े
संशोधित सूची में 100 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के करीब 125 मतदाता दर्ज किए गए साथ ही थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 166 से घटकर 72 रह गई विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार बैरसिया में सबसे कम 8,889 मतदाता कम हुए जबकि भोपाल मध्य, दक्षिण-पश्चिम और हुजूर में भी बड़ी संख्या में नाम हटे
विशेषज्ञों की राय और महत्व
चुनाव प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया निर्वाचन सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है प्रशासन का कहना है कि डिजिटल सत्यापन और फील्ड सर्वे के संयोजन से मतदाता डेटा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है
