सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जांच सच्चाई सामने लाने के बजाय उसे छिपाने जैसी प्रतीत हो रही है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि कई मामलों में पुलिस केवल ड्राइवर या कैरियर तक कार्रवाई सीमित कर देती है, जबकि तस्करी के मुख्य सरगना तक पहुंचने का प्रयास नहीं किया जाता। हाईकोर्ट ने इसे गंभीर जांचीय कमी मानते हुए कड़ा रुख अपनाया।
यह मामला इंदौर से चंडीगढ़ भेजी जा रही 1209 किलो पोस्त भूसी की जब्ती से संबंधित है। अदालत ने पाया कि न तो माल भेजने वालों की समुचित जांच हुई और न ही प्राप्तकर्ताओं की भूमिका स्पष्ट की गई। सबसे गंभीर पहलू यह रहा कि जब्त मादक पदार्थ से जुड़े 62 सैंपल बैग थाने से गायब पाए गए। पुलिस ने 17 जनवरी 2025 को सामग्री के निस्तारण का हवाला दिया, जबकि सैंपल बैग उपलब्ध नहीं थे और ट्रायल कोर्ट में जब्त सामग्री प्रस्तुत भी नहीं की गई।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उस समय पदस्थ थाना प्रभारी और जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू की जाए तथा जांच पूरी होने तक उन्हें किसी थाने का प्रभार न दिया जाए। कोर्ट ने तीन माह के भीतर शपथपत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। साथ ही प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी भोपाल और एडीजी नारकोटिक्स इंदौर को यह निर्देश भी दिए गए कि सभी जिलों में एनडीपीएस मामलों में ‘एपेक्स परपेरेटर्स’ की पहचान और कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अगली सुनवाई 25 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
एसपी राठौड़ ने देहात थाना प्रभारी जितेंद्र मावई, उप निरीक्षक राघवेंद्र यादव और हरिशंकर शर्मा को लाइन अटैच किया है। इसके अतिरिक्त बालाघाट में पदस्थ उप निरीक्षक अंकित उपाध्याय और राजगढ़ में पदस्थ निरीक्षक मनीष शर्मा पर भी समान कार्रवाई की गई है। दो संबंधित अधिकारी पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
इस मामले में विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस एक्ट, शिवपुरी ने 26 सितंबर 2025 को आरोपी जगशीर को धारा 8/15सी के तहत दोषी ठहराते हुए 15 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। बाद में सजा स्थगन संबंधी अर्जी वापस ले ली गई।
ग्वालियर हाईकोर्ट की यह कार्रवाई न केवल शिवपुरी पुलिस के लिए चेतावनी है बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में एनडीपीएस मामलों में जांच की गंभीरता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी मील का पत्थर साबित हो सकती है। न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि जांच अधिकारी केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए काम नहीं कर सकते, बल्कि तस्करी के असली सरगनाओं तक पहुंचने का प्रयास करना अनिवार्य है।
