कटारे ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस उनके स्वर्गीय पिता की विरासत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शादी की सालगिरह पर परिवार के साथ समय बिताना उनका अधिकार है और इसे लेकर किसी साजिश की बात नहीं है। उन्होंने विपक्षी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि सोमवार से वे सदन में पूरी तैयारी और दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहेंगे और सरकार के भ्रष्टाचार, गोमांस मुद्दा, इंदौर के भागीरथपुरा, शंकराचार्य के अपमान और जहरीली हवा-पानी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर आवाज उठाएंगे। अंत में उन्होंने कहा, “मैं पद से नहीं, जनता के विश्वास से ताकत लेता हूं, वही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है।”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि कटारे ने अपने ट्वीट और पोस्ट में सारी बातें साफ कर दी हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता के विश्वास से ही काम करता है और कटारे ने जो कहना था, सार्वजनिक रूप से कह दिया है।
कांग्रेस में जारी चर्चाओं पर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने इसे पार्टी का आंतरिक मामला बताया। चौधरी ने कहा कि कटारे की नियुक्ति अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने की थी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन्हें पद दिया था। इसलिए इस्तीफा स्वीकार करने का अधिकार भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास ही है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में हुई बैठक में इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर प्रक्रिया जारी है।
चौधरी ने यह भी कहा कि पार्टी की आंतरिक प्रक्रिया को हर बार सार्वजनिक करना संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कटारे ने इस्तीफा किन परिस्थितियों में दिया, इसकी जानकारी पार्टी नेतृत्व को दे दी गई है और जो संदेह थे, उनका जवाब उन्होंने ट्वीट के माध्यम से दे दिया।
प्रदेश प्रभारी ने दोहराया कि कांग्रेस में संवाद की परंपरा कायम है और हर कार्यकर्ता से बातचीत जारी रहती है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में भी संवाद जारी है और अंतिम निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व ही करेगा।
