मामले के अनुसार कलेक्टर ने खनन विभाग की रिपोर्ट को बिना ठीक से जांचे मंजूरी दे दी थी जिस पर छिंदवाड़ा निवासी सारंग रघुवंशी ने आपत्ति जताते हुए इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि संबंधित आदेश में गंभीर लापरवाही बरती गई है और बिना उचित जांच के निर्णय लिया गया
हाईकोर्ट ने कलेक्टर के इस व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे प्रशासनिक जिम्मेदारी का उल्लंघन माना अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी निर्णय से पहले सभी तथ्यों और रिपोर्टों की गहन जांच आवश्यक होती है ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे
यह मामला वर्ष 2025 का बताया जा रहा है जब परिवहन विभाग ने अवैध परिवहन के एक ट्रक को जब्त किया था इस दौरान ट्रक के असली मालिक की पहचान किए बिना याचिकाकर्ता को ही ट्रक मालिक मान लिया गया था याचिकाकर्ता ने बार बार अपनी सफाई पेश की लेकिन विभाग ने उनकी बात को अनसुना कर दिया जिससे उन्हें न्याय के लिए अदालत का रुख करना पड़ा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में न केवल कलेक्टर के निर्णय को निरस्त किया बल्कि यह भी निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि याचिकाकर्ता को दी जाए यह फैसला इस बात का संकेत है कि न्यायालय प्रशासनिक मनमानी और लापरवाही के मामलों में सख्त रुख अपनाए हुए है
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी अधिकारियों को अपने निर्णयों में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए और नियमों का पालन करते हुए ही किसी भी प्रकार का आदेश जारी करना चाहिए अन्यथा उन्हें न्यायालय की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है
