हमलावरों ने अनिल केवट को घर के बाहर एक बिजली के खंभे से बांध दिया और उन्हें बुरी तरह से पीटा। वहीं हिंसा की पराकाष्ठा तब हुई जब मायके वालों ने अनिल के पिता रामप्रसाद को एक कमरे में बंद कर दिया और उन पर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की तैयारी शुरू कर दी। इसी बीच अनिल के भाई को भी गंभीर रूप से घायल किया गया। यह पूरा विवाद बुढार क्षेत्र में हुआ।
परिजनों द्वारा तत्काल सूचना दिए जाने पर बुढार पुलिस और डायल-112 टीम ने त्वरित कार्रवाई की। पुलिस टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर अनिल केवट को हमलावरों के चंगुल से बंधन मुक्त कराया। साथ ही रामप्रसाद को कमरे का दरवाजा तोड़कर बचाया गया जिससे उनकी जान बच सकी। पुलिस ने घायल भाई को भी सुरक्षित निकाला। समय पर और जोखिम भरा हस्तक्षेप करके पुलिसकर्मियों ने तीनों पीड़ित सदस्यों की जान बचाई।
इस खौफनाक घटना के बाद पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस अधीक्षक ने इस साहसिक कार्य के लिए बुढार पुलिस और डायल-112 टीम के जवानों को सम्मानित करने की घोषणा की है जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर एक बड़े अनर्थ को टाल दिया। यह घटना प्रेम विवाह के बाद पैदा होने वाले सामाजिक और पारिवारिक तनावों की गंभीरता को दर्शाती है जब आपसी सहमति के बजाय हिंसा का सहारा लिया जाता है। पुलिस की तत्परता ने एक वीभत्स हत्याकांड को होने से रोका।
