नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में ड्रग माफियाओं के खिलाफ मोहन यादव सरकार ने तीन साल का विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत राज्य के प्रमुख शहरों में ड्रग सप्लाई नेटवर्क को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। पुलिस महानिदेशक डीजीपी कैलाश मकवाना की अध्यक्षता में गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में उच्च स्तरीय बैठक हुई। उन्होंने बताया कि पिछले साल शुरू किया गया राज्य पुलिस का ड्रग्स आर ए डिस्टेंस अभियान काफी सफल रहा। डीजीपी ने कहा जिस तरह राज्य नक्सलवाद से मुक्त हुआ वैसे ही ड्रग्स के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई करनी होगी।
डिमांड और सप्लाई चेन पर फोकस
डीजीपी ने बताया कि अगले तीन साल में मंदसौर, नीमच, रतलाम, भोपाल, इंदौर और अन्य प्रभावित इलाकों में ड्रग तस्करी की डिमांड और सप्लाई चेन तोड़ी जाएगी। शैक्षणिक संस्थानों के पास नशीले पदार्थों की बिक्री पर कड़ा प्रतिबंध लगाने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग और सामाजिक संगठनों के सहयोग से रोडमैप तैयार किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले कैमिकल्स का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए भी सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इस तीन वर्षीय योजना में ड्रग सप्लाई चेन को तोड़ना, ड्रग डिमांड को कम करना और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना प्रमुख लक्ष्य हैं।
तस्करों की संपत्ति जब्त
डीजीपी के अनुसार 2025 में राज्य में 1,44,025 किलोग्राम ड्रग्स कुल कीमत 347 करोड़ रुपए जब्त कर नष्ट किया गया। इसके अलावा ड्रग तस्करों के खिलाफ SAFEMA एक्ट के तहत 301.41 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। मंदसौर और नीमच जिले इस कार्रवाई से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे।
