रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के धौंसवास गांव में गुरुवार सुबह प्रशासन की टीम ने निर्माणाधीन मालवीय समाज धर्मशाला को हटाने के लिए कार्रवाई की जिसके बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। इस घटना ने न केवल प्रशासन और समाज के बीच तनाव को बढ़ाया बल्कि सड़क पर व्यापक जाम की स्थिति भी उत्पन्न कर दी।
प्रशासन ने की बुलडोजर से कार्रवाई
गुरुवार की सुबह करीब 5 बजे प्रशासन और पुलिस बल ने नामली थाना क्षेत्र के धौंसवास गांव में निर्माणाधीन मालवीय समाज धर्मशाला के खिलाफ बुलडोजर चलाकर उसे हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। यह अचानक की गई कार्रवाई समाज के लोगों के लिए चौंकाने वाली थी क्योंकि इतनी जल्दी सुबह-सुबह इस तरह की कार्रवाई से वे अंजान थे।
समाजजनों का आक्रोश और जाम
धर्मशाला को हटाए जाने की सूचना मिलते ही मालवीय समाज के लोग गुस्से में आ गए। समाज के महिला पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में महू-नीमच फोरलेन पर आकर बैठ गए और दोनों दिशा में यातायात जाम कर दिया। इस जाम के कारण सड़क पर लगभग 5 किलोमीटर लंबा जाम लग गया जिससे आम यात्री और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। समाजजन अपनी धार्मिक जगह को हटाने के प्रशासन के फैसले का विरोध कर रहे थे और इसके लिए वे शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना था कि यह धर्मशाला समाज के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है और इसे हटाना उचित नहीं है।
प्रशासन की ओर से प्रयास
जाम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर एसडीएम आर्ची हरित, तहसीलदार ऋषभ ठाकुर एसडीपीओ किशोर पाटनवाला और थाना प्रभारी गायत्री सोनी सहित भारी पुलिस बल तैनात किया। प्रशासन के अधिकारियों ने समाजजनों से बातचीत की और उन्हें शांतिपूर्वक विरोध करने की अपील की साथ ही कार्रवाई के कारणों को स्पष्ट करने की कोशिश की। प्रशासन का कहना था कि यह धर्मशाला अवैध निर्माण के तहत बनी है और इसे नियमों के अनुसार हटाना आवश्यक था। हालांकि समाज के लोग प्रशासन की इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थे और उनका कहना था कि उन्हें इस फैसले के बारे में पहले ही जानकारी दी जानी चाहिए थी।
समाज और प्रशासन के बीच समझौता
जाम की स्थिति और बढ़ते तनाव को देखकर प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास तेज किए। समाज के नेताओं और प्रशासन के बीच बातचीत जारी रही, ताकि विवाद को शांति से सुलझाया जा सके। कुछ समय बाद प्रशासन ने मामले को सुलझाने के लिए समाजजनों से समझौता करने की दिशा में कदम बढ़ाए। धौंसवास गांव में हुई यह घटना प्रशासन और स्थानीय समाज के बीच एक महत्वपूर्ण संदेश दे रही है कि किसी भी कार्रवाई से पहले स्थानीय समुदाय को विश्वास में लेना जरूरी है।
धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में आमतौर पर संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है और ऐसे विवादों को सुलझाने के लिए सभी पक्षों से संवाद करना बेहद जरूरी है। इस घटना के बाद प्रशासन और समाज दोनों के लिए यह एक सीख है कि किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए संयम और समझौते की जरूरत होती है।
