वकालत: दलीलों का नहीं, सत्य और नैतिकता का पेशा – जस्टिस जितेंद्र माहेश्वरी सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जितेंद्र माहेश्वरी ने कॉन्क्लेव में कहा-वकालत केवल तर्क प्रस्तुत करने की कला नहीं, बल्कि सत्य की इबादत है। अधिवक्ता ऑफिसर ऑफ द कोर्ट होते हैं-उनका पहला दायित्व न्याय और सत्य के प्रति है न कि हर कीमत पर क्लाइंट की जीत सुनिश्चित करना। यदि वकील तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करता है तो वह गलत राह पर है।
उन्होंने वकीलों की भाषा में शिष्टता और तहज़ीब को अनिवार्य बताया- भाषा में नफासत होनी चाहिए। जब आप कोर्ट से बाहर निकलें तो विपक्षी भी आपकी वकालत की प्रशंसा करे। जस्टिस माहेश्वरी ने नाना पालकीवाला का उदाहरण देते हुए कहा कि वे बहस नहीं, बल्कि जटिल -पहेलियाँ सुलझाते दिखते थे। कानून की किताबें वकील बनाती हैं लेकिन कोर्ट क्राफ्ट एक महान अधिवक्ता बनाता है।
सफल वकालत के सूत्र – जस्टिस माहेश्वरी
सबसे पहले जज को पढ़िए-उनकी प्रवृत्ति, प्रश्न, दृष्टिकोण। मजबूत ड्राफ्टिंग-यही केस की नींव है।ब्रीफ समुचित हो आधा ज्ञान सबसे बड़ा जोखिम है। प्रेजेंटेशन छोटा, सटीक, विनम्र हो। दो घंटे बहस करने से बेहतर है पाँच मिनट में सारगर्भित तर्क देना। विनम्रता से न्यायाधीश भी संवेदनशील होते हैं -जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने अपने उद्बोधन की शुरुआत अधिवक्ता विकास यादव को श्रद्धांजलि देकर की।
सबमिशन संक्षिप्त हो।
एक अच्छा वकील दलील देता है लेकिन ग्रेट लॉयर मनवा लेता है। हर फाइल में एक जीवन-वकील समाज के हीलर्स हैं: जस्टिस आनंद पाठक ग्वालियर बेंच के न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने एडवोकेसी के 7 लैंप पर चर्चा करते हुए कहा- एक वकील में ईमानदारी, साहस, मेहनत, निर्भीकता और सत्यनिष्ठा जरूरी हैं। हर फाइल में एक लाइफ है। संवेदनशीलता वकील को सच्चा हीलर बनाती है।
उन्होंने चार फिटनेस मॉडल बताया:
1. फिजिकल फिटनेस
पेशा प्रतिदिन 10–14 घंटे की मेहनत मांगता है।
2. मेंटल फिटनेस
कानून के साथ-साथ सामान्य साहित्य पढ़ें, यात्रा करें, लोगों से बातचीत करें-यह समझ और दृष्टि को मजबूत करता है।
3. इमोशनल फिटनेस
फ़ैसला पक्ष में हो या न हो-भावनात्मक संतुलन ज़रूरी।
4. स्पिरिचुअल फिटनेस
पेशा एक भूमिका है-उतार-चढ़ाव को स्वीकार करने से ही संतुष्टि और हीलिंग का भाव आता है। अधूरी तैयारी न्याय को कमजोर करती है – जस्टिस विवेक रुसिया जबलपुर मुख्य पीठ के न्यायमूर्ति विवेक रुसिया ने कहा- अधूरी तैयारी वकील ही नहीं न्याय प्रक्रिया को भी कमजोर करती है। क्रॉस-एग्ज़ामिनेशन लंबा न हो-पॉइंट टू पॉइंट हो। वकील का आचरण ही उसकी पहचान है। उन्होंने SID सूत्र साझा किया-
S – Speak with clarity
I – Interpret with integrity
D – Display dignity
न्याय सिर्फ होना नहीं चाहिए-दिखना भी चाहिए।
कॉन्क्लेव में नेतृत्व की सहभागिता
कार्यक्रम में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी, सचिव लोकेश मेहता, उपाध्यक्ष मृदुल भटनागर, संयुक्त सचिव सागर मुले, तथा कार्यकारिणी सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
