सुबह ब्रह्ममुहूर्त में होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दौरान दोनों क्रिकेटरों ने पूरे विधि विधान से दर्शन किए। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग के समक्ष उन्होंने ध्यान लगाया और नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना भी कही। भस्म आरती के आध्यात्मिक वातावरण और मंत्रोच्चार के बीच दोनों खिलाड़ी श्रद्धा में लीन दिखाई दिए।
भस्म आरती के उपरांत मंदिर समिति की ओर से दोनों खिलाड़ियों का पारंपरिक रूप से सम्मान किया गया। उन्हें प्रसाद और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी क्रिकेटरों की एक झलक पाने के लिए उत्साह दिखाया हालांकि दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होती रही।
इस अवसर पर कर्ण शर्मा ने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें बार बार उज्जैन आने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा जब भी बाबा बुलाते हैं मैं दर्शन के लिए जरूर आता हूं। यहां आकर मन को शांति मिलती है और मंदिर की व्यवस्थाएं भी अत्यंत सुव्यवस्थित हैं। उन्होंने भस्म आरती को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव बताते हुए कहा कि इस आरती में शामिल होना किसी भी श्रद्धालु के लिए विशेष सौभाग्य की बात है।
वहीं सिद्धार्थ कौल ने भी बाबा महाकाल के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महाकाल के दर्शन से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भस्म आरती के दौरान जो आध्यात्मिक वातावरण बनता है वह मन और आत्मा को एक अलग शक्ति देता है। मेरा मानना है कि हर व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार बाबा महाकाल की भस्म आरती में जरूर शामिल होना चाहिए कौल ने कहा।
उल्लेखनीय है कि महाकाल मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन तड़के होने वाली भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है। देश विदेश से श्रद्धालु इस अनूठी आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। क्रिकेटरों की इस आध्यात्मिक यात्रा ने एक बार फिर यह साबित किया कि खेल जगत की हस्तियां भी अपनी आस्था से गहराई से जुड़ी हैं और महत्वपूर्ण अवसरों पर ईश्वर का आशीर्वाद लेना नहीं भूलतीं।
