गांधी हॉल परिसर को मालवा-निमाड़ की पारंपरिक शैली में सजाया गया है। दीवारों की सज्जा, अलंकरण और मंच व्यवस्था में जनजातीय सौंदर्यबोध की स्पष्ट झलक देखने को मिली। प्रदेश के विभिन्न आदिवासी अंचलों से आए कलाकारों ने पारंपरिक लोकनृत्यों की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। भगोरिया और मांदल गीतों की गूंज ने वातावरण को जीवंत कर दिया।
भगोरिया पर्व पर आधारित विशेष फोटो प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। धार, झाबुआ और अलीराजपुर अंचल की प्रसिद्ध पिथोरा कला को भी विशेष स्थान दिया गया है। ट्राइबल फाउंडेशन द्वारा स्थापित पिथोरा आर्ट गैलरी में 25 से अधिक चयनित पिथोरा पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें आदिवासी जीवन, आस्था, प्रकृति और उत्सवों की सजीव अभिव्यक्ति नजर आई।
शुभारम्भ अवसर पर शनि साधक पूज्य गुरुजी दादू महाराज, शंकर लालवानी, पुष्यमित्र भार्गव, भाजपा नगर उपाध्यक्ष भरत पारख तथा स्टेट प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर आयोजन का विधिवत शुभारम्भ किया।
‘जात्रा–2026’ के आगामी दो दिनों में भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, पारंपरिक हस्तशिल्प प्रदर्शनी और जनजातीय व्यंजनों के स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने रहेंगे।
