समय सीमा खत्म, फिर भी नहीं कराया नवीनीकरण
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सभी निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को 1 जनवरी से 28 फरवरी 2026 के बीच पंजीयन का नवीनीकरण कराना अनिवार्य था। इसके बाद भी कई संस्थानों ने 1 अप्रैल 2026 की अंतिम तिथि तक आवेदन नहीं किया। इसी लापरवाही के चलते यह सख्त कार्रवाई की गई।
1 अप्रैल से सभी संस्थान अवैध घोषित
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत कोठारी के आदेश के बाद इन सभी अस्पतालों और क्लीनिकों को 1 अप्रैल से अवैध घोषित कर दिया गया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि बिना वैध पंजीयन किसी भी तरह का इलाज या भर्ती पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
किन अस्पतालों पर गिरी गाज
जिन प्रमुख अस्पतालों पर कार्रवाई हुई है उनमें शामिल हैं-
एस.सी. गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल (स्टाफ की कमी)
संकल्प हॉस्पिटल (नगर निगम से दस्तावेज सत्यापन नहीं)
नामदेव नर्सिंग होम (नवीनीकरण नहीं कराया)
बटालिया आई हॉस्पिटल (स्वयं बंद करने का आवेदन)
सरकार हॉस्पिटल (स्वयं संस्थान बंद किया)
जांच में सामने आया कि जिले के कुल 240 क्लीनिकों में से 89 ने नवीनीकरण के लिए आवेदन ही नहीं किया, जबकि 32 संस्थानों के दस्तावेज अधूरे पाए गए। इनमें एलोपैथी, आयुर्वेदिक, होम्योपैथी क्लीनिक के साथ कई पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटर भी शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग के सख्त निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रभावित संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि–
किसी भी नए मरीज को भर्ती न किया जाए
पहले से भर्ती मरीजों का उपचार पूरा कर डिस्चार्ज किया जाए
संस्थानों के बाहर लगे बोर्ड तुरंत हटाए जाएं
यह कार्रवाई मध्य प्रदेश नर्सिंग होम एक्ट के तहत की गई है। अधिकारियों ने साफ किया है कि बिना वैध पंजीयन के किसी भी संस्थान को संचालित पाए जाने पर आगे भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
