हज़ारों को मिला लाभ, 3600 सर्जरी का रिकॉर्ड
बिश्नोई ने बताया कि इस मेगा हेल्थ स्पेशियलिटी में करीब 350 विशेषज्ञ विद्वानों ने अपना वैज्ञानिक अध्ययन किया है। प्रतिदिन 20 से 25 हजार की संख्या में लोग निकले, जिसमें लाखों लोग शामिल हुए। ऑपरेशन के दौरान लगभग 3600 सर्जरी की गईं, जिनमें कई जटिल ऑपरेशन शामिल थे। खास बात यह है कि शिवपुरी में पहली बार रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिसमें यूनिवर्सल लेवल की सुविधा बताई गई।
रोबोटिक सर्जरी का अनुभव, तोमर की प्रसिद्धि
प्रोग्राम में विद्यार्थियों ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने करीब एक घंटे तक रोबोटिक सर्जरी का परीक्षण किया, जहां डॉक्टर मशीन के जरिए दूर से ऑपरेशन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऐसी सुविधा न्यूयॉर्क और लंदन जैसे शहरों में भी आसानी से उपलब्ध नहीं है। इस दौरान उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को इस इवेंट का “चौकीदार” बनाने के बारे में बताया और हर साल ऐसे कैंप आयोजित करने की घोषणा की।
मंत्री के जाते ही भोजन स्थल मची रेस्तरां-रेकर
हालाँकि, कार्यक्रम के समापन के बाद भोजन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। जैसे ही ऑल कोर्स प्रोग्राम से अट्रैक्शन हुए, वहां पर किसानों की भीड़ मौजूद रहती है। स्थिति ऐसी बनी कि लोग प्लेट और भोजन के लिए एक-दूसरे से आगे की यात्रा करने की कोशिश करने लगे, जिससे कुछ देर के लिए रिमोट-सामुहिक का मोहरा बन गया।
यूजीसी कानून पर सर्व समाज की विचारधारा
इसी कार्यक्रम के दौरान यूजीसी कानून का विरोध कर रहे साम्य समाज के लोग भी केंद्रीय मंत्री को स्पष्टीकरण देने की मांग कर रहे थे। स्पष्ट ने कहा तो स्वीकार किया गया, लेकिन उस पर विस्तार से चर्चा बिना आगे बढ़ा दी गई। इससे नाराज लोगों ने इसे अपनी अनदेखी की गई फोटो के साथ पोस्ट किया और कहा कि उनकी जिम्मेदारियों को चुपचाप सुना जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, जहां एक ओर मेगा हेल्थ कैंप की सफलता और चिकित्सा सुविधाओं ने शिवपुरी को नई पहचान दी, वहीं दूसरी ओर कार्यक्रमों के अंत में नतीजे और कुछ भव्य की झलक ने समारोह की चमक को थोड़ा कम कर दिया।
