सतना । मध्य प्रदेश के सतना जिले में लोकायुक्त रीवा टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए GST निरीक्षक कुमार सौरभ को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें बताया गया था कि आरोपी निरीक्षक ने एक व्यापारी से 15 लाख रुपये के ई-वे बिल पास करने के लिए रिश्वत की मांग की थी। घटना 29 नवंबर को तब सामने आई जब वीरेंद्र कुमार शर्मा जो कि कैलाशराज ट्रैक्टर्स फर्म के कर्मी हैं ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज करवाई। वीरेंद्र ने बताया कि साल 2020-21 में एक ई-वे बिल प्रकरण के चलते निरीक्षक कुमार सौरभ ने उनसे बिना पेनल्टी लगाए और कार्रवाई न करने के बदले रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत के अनुसार सौरभ ने पहले 1 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी लेकिन बाद में यह राशि 60,000 रुपये में तय हो गई। इसके बाद आरोपी निरीक्षक ने 20,000 रुपये की पहली किस्त तुरंत देने का दबाव बनाया। 1 दिसंबर को लोकायुक्त रीवा टीम ने जाल बिछाया और आरोपी को उसके सरकारी आवास पर रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह ने किया, जबकि ट्रैप कार्रवाई का संचालन निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया ने किया। टीम में उप निरीक्षक आकांक्षा शुक्ला निरीक्षक उपेंद्र दुबे प्रधान आरक्षक मुकेश मिश्रा आरक्षक पवन पांडे शाहिद खान लवलेश पांडे सुभाष विजय और मनोज भी शामिल थे।
सौरभ प्रिवेंटिव शाखा में पदस्थ थे और उनके अधिकार क्षेत्र में धारा 64 और 74 के तहत के मामलों की जांच होती थी। शिकायतकर्ता वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि निरीक्षक सौरभ ने बिना किसी वैध कारण के ई-वे बिल में माल न आने नॉन-मूवमेंट और खरीदी ज्यादा तथा टैक्स कम होने की स्थिति में कार्रवाई करने की धमकी दी थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि ई-वे बिल ड्रॉप होना विक्रेता की प्रक्रिया है, और माल न आने की स्थिति में इसके लिए खरीदार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। बावजूद इसके, निरीक्षक ने बड़ी कार्रवाई का हवाला देते हुए रिश्वत की मांग जारी रखी।
इस मामले में लोकायुक्त ने सौरभ की रिश्वतखोरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की और उन्हें पकड़ा। आरोपी निरीक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। यह कार्रवाई लोकायुक्त के महानिदेशक योगेश देशमुख के सख्त निर्देशों के तहत की गई जिनकी निगरानी में इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। रिश्वतखोरी के इस बड़े मामले के खुलासे के बाद लोगों में सरकारी अधिकारियों की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की उम्मीदें जागी हैं। लोकायुक्त ने इस मामले की जांच पूरी कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
