सीएम डॉ. यादव ने बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन किए और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमण कर वहां के क्राउड फ्लो डिजाइन, इंफ्रास्ट्रक्चर और तीर्थयात्री प्रबंधन प्रणाली का अवलोकन किया। उन्होंने भीड़ प्रबंधन पर विशेष प्रस्तुतियां देखीं और मंदिर परिसर में अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
मुख्यमंत्री ने मीडिया से कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का प्रबंधन बहुत प्रभावशाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल और स्थानीय निवासियों के सहयोग ने इसे संभव बनाया। बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल के माध्यम से धार्मिक पर्यटन को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
धार्मिक पर्यटन और लघु उद्योगों पर विशेष फोकस करते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ओडीओपी योजना में उत्तर प्रदेश ने बेहतरीन काम किया है और मध्यप्रदेश भी इसे अपनाने और सुधारने पर काम कर रहा है। जैसे उत्तर प्रदेश में बनारसी साड़ी की विरासत रही, वैसे ही मध्यप्रदेश में चंदेरी और महेश्वरी साड़ी सहित अन्य लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सीएम ने कहा कि बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर में भीड़ प्रबंधन जैसा मॉडल मध्यप्रदेश में सिंहस्थ के दौरान लागू किया जाएगा। उनका उद्देश्य बेहतर धार्मिक पर्यटन व्यवस्था सुनिश्चित करना और इससे आम लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने बताया कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के सफल प्रबंधन से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में सुधार आया है, और इसी मॉडल को मध्यप्रदेश में लागू किया जाएगा।
दोनों राज्यों के बीच योजनाओं और जानकारियों के आदान-प्रदान के लिए एमओयू भी साइन किए जाएंगे। इसका उद्देश्य दर्शनार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और धार्मिक पर्यटन के माध्यम से रोजगार और आर्थिक समृद्धि बढ़ाना है। इसके अलावा, केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और सोलर ऊर्जा परियोजनाओं पर भी दोनों राज्य सहयोग कर रहे हैं।
गरीबों और युवाओं के जीवन में सुधार लाने, लघु उद्योगों के उत्पादों को सही कीमत दिलाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए भी यह सम्मेलन महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर रिसर्च जारी है और बाबा विश्वनाथ धाम पर 3-5 अप्रैल को उनके जीवन पर आधारित महानाट्य का मंचन किया जाएगा, जिसमें करीब 400 कलाकार भाग लेंगे। डॉ. मोहन यादव ने जोर दिया कि अब समय कटुता का नहीं, सौहाद्र का है। दोनों राज्य मिलकर धार्मिक पर्यटन, लघु उद्योग और पर्यावरणीय परियोजनाओं के जरिए विकास की नई इबारत लिखेंगे।
