आयकर विभाग के अनुसार यह स्कूल भवन “राजमाता (भारतमाता) शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति” नामक ट्रस्ट के नाम पर पंजीकृत है, जिसकी लागत लगभग 7.5 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इस ट्रस्ट में सौरभ शर्मा की मां उमा शर्मा, उनके सहयोगी चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल ट्रस्टी के रूप में दर्ज हैं। जांच में यह सामने आया कि ट्रस्ट केवल बेनामी (नाममात्र) है और वास्तविक मालिक सौरभ शर्मा ही है।
बेनामी घोषित, नोटिस जारी
बीपीयू की जांच में यह स्कूल भवन बेनामी संपत्ति पाया गया और इसे बेनामी लेन-देन निषेध अधिनियम (PBPT Act), 1988 के तहत धारा 24(3) के अंतर्गत अटैच किया गया। साथ ही बेनामीदारों और वास्तविक स्वामी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है।
सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट ने इस स्कूल के संचालन के लिए किसी प्रमुख स्कूल श्रृंखला से फ्रेंचाइजी भी ली थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह संपत्ति केवल “नाम का स्कूल” नहीं, बल्कि व्यावसायिक तौर पर भी चलाया जा रहा था। आयकर विभाग अब स्कूल निर्माण में लगाए गए धन के स्रोत और ट्रस्ट की अन्य गतिविधियों की भी जांच कर रहा है।
आयकर विभाग ने यह भी बताया है कि यह कार्रवाई सोना–कैश इनोवा मामले से जुड़ी अन्य संपत्तियों पर चल रहे सिलसिले की अगली कड़ी है।
52 किलो सोना और 11 करोड़ नकद वाली इनोवा
याद दिला दें कि 18-19 दिसंबर 2024 की मध्यरात्रि में भोपाल के मेंडोरी गांव में ग्वालियर आरटीओ से रजिस्टर्ड इनोवा कार लावारिस हालत में मिली थी। कार चेतन सिंह गौर के नाम पर रजिस्टर्ड थी। जांच में वाहन से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए थे।
ED भी कर रहा जांच
इसी मामले में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने सौरभ शर्मा के ठिकानों से मिले ट्रांसफर-पोस्टिंग के दस्तावेज की जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि ईडी इस मामले में कुछ नेताओं और अफसरों से भी पूछताछ कर सकती है और इसके लिए दिल्ली मुख्यालय से मशविरा मांगा गया है।
