प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुवार को अचानक गोदाम से धुआं उठता दिखाई दिया और कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते धान से भरी बोरियां आग की चपेट में आ गईं। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू तो पा लिया गया, लेकिन तब तक गोदाम में रखा अधिकांश धान नष्ट हो चुका था।
घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर, एसडीएम सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने प्रारंभिक तौर पर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल आग लगने का कारण अज्ञात बताया जा रहा है, लेकिन जिस तरह से आग तेजी से फैली, उसने कई तरह के संदेह पैदा कर दिए हैं।
इस घटना ने जिले की धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में शहडोल जिले में धान खरीदी को लेकर कई गड़बड़ियों के मामले सामने आ चुके हैं। कुछ दिन पहले ही धान की बोरियों से पत्थर और कंकड़ निकलने का मामला उजागर हुआ था, जिसने पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिया था। अब बीज भंडार में आग लगने की इस घटना ने संदेह को और गहरा कर दिया है।
स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि यदि यह हादसा है तो सुरक्षा इंतजामों में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, और यदि यह लापरवाही या किसी साजिश का नतीजा है तो इसके पीछे जिम्मेदार कौन है किसानों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि जलकर नष्ट हुआ धान आखिर किसका था और इसका असर उनकी भुगतान प्रक्रिया पर तो नहीं पड़ेगा।
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आगजनी के कारणों की हर पहलू से जांच की जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस घटना ने न केवल सरकारी भंडारण व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि किसानों के भरोसे को भी गहरी ठेस पहुंचाई है।
